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शशि थरूर की कहानी सुन भावुक हुआ एक अंग्रेज, मांगी जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए माफी

Published on 20 May, 2018 at 6:16 pm By

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जलियांवाला बाग नरसंहार एक भयावह अध्याय है। 13 अप्रैल, 1919 एक खूनी दिन के तौर पर दर्ज है। इसी दिन ब्रिगेडियर जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में सभा कर रहे निहत्थे भारतीयों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं और सैकड़ों बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों में महिलाएं, बच्चे, बूढ़े देश के युवा सभी थे।


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अंग्रेज अफसर ब्रिगेडियर जनरल डायर के आदेश पर 10 मिनट तक 1650 राउंड गोलिया बरसाई गईं थी। गोलीबारी से डरे मासूम बाग में स्थित एक कुएं में कूदने लगे। गोलीबारी के बाद कुएं से करीब 200 शव बरामद हुए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं। इस घटना ने भारत के इतिहास की धारा को बदल कर रख दिया।

 

 

हाल ही में कांग्रेस नेता, लेखक, साहित्यकार शशि थरूर ऑकलैंड में लेखकों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां कुछ गिने-चुने लेखकों को एक सच्ची घटना पर बोलने के लिये कहा गया। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंघार कि घटना को सबके सामने रखा।


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इसके बाद एक शख्स ने उनसे किस तरह उस सम्मलेन में एक ब्रितिशेर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए इस शर्मनाक कृतज्ञ कि माफ़ी मांगी। इसका जिक्र उन्होंने ट्वीट कर किया।

 

 

थरूर ने ट्वीट कर लिखा:

 

“ऑकलैंड रायटर्स फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान कुछ चुनिन्दा लेखकों को 7 मिनट के भीतर एक ‘सच्ची कहानी’ सुनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। मैंने जलियांवाला बाग नरसंहार जिक्र किया। उसके बाद किताब में हस्ताक्षर के वक़्त एक अंग्रेज मेरे पास आया ये नोट थमा गया।”

 

इस नोट में लिखा था: “मैं जन्म से एक ब्रिटिश हूं और मैं मांफ़ी मांगता हूं।”

 

 

लोगों ने उस ब्रिटिश नौजवान के इस कदम की सरहाना कर रहे हैं आखिर उसे अपने पूर्वजों द्वारा किए गए उस कृत्य अपराध का बोध है।

 


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