यूरोपीय यूनियन से अलग हुआ ब्रिटेन, भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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Updated on 24 Jun, 2016 at 5:46 pm

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ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से अलग होना तय माना जा रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जनमत संग्रह में 72 फीसदी मतदान हुआ है।

अभी तक घोषित 70 प्रतिशत नतीजों में ‘लीव’ अभियान ने 52 प्रतिशत मत हासिल किए हैं जबकि ‘रिमेन’ खेमे के पक्ष में 48 प्रतिशत वोट आए हैं।

पहले कांटे का टक्कर होने की भविष्यवाणी की गई थी, जो सही साबित हुई। कल हुए जनमत संग्रह में ब्रिटेन के छह करोड़ लोगों ने वोटिंग की है।

बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में अधिकतर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में वोट दिया है। वहीं, लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के अधिकतर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ के साथ बने रहने के पक्ष में वोट दिया है।

इस बीच, वित्त सचिव अंजुले दुग्गल ने बयान जारी कर कहा है कि भारत को यूरोपीय यूनियन जनमत संग्रह से घबराने की जरूरत नहीं है। इससे अधिक नुकसान नहीं होगा और सरकार व रिज़र्व बैंक इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।



यूरोपीय यूनियन 28 देशों का समूह है, जहां फ्री ट्रेड है। इसका मतलब यह है कि इन 28 देशों के लोग किसी भी देश में रह सकते हैं या व्यवसाय कर सकते हैं।

ब्रिटेन में पिछले कुछ समय से यूरोपीय यूनियन से अलग होने की मांग उठ रही थी। इस अभियान को चलाने वालों का तर्क था कि इससे दूसरे देशों से आने वालों पर अंकुश लगेगा।

आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में प्रतिदिन 500 से अधिक प्रवासी रोजगार के लिए दाखिल होते हैं।


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