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सहिष्णुता की मिसाल बने विश्व हिन्दू परिषद के एक नेता, कर रहे हैं मुसलमानों की बेहतरी के लिए काम

Updated on 7 November, 2015 at 7:09 pm By

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में विश्व हिन्दू परिषद के नेता बृजेश त्रिपाठी सहिष्णुता की मिसाल बन कर उभरे हैं। दरअसल. उन्होंने तीन मुस्लिम बच्चियों को गोद लिया है और शिक्षा व स्किल डेवलपमेन्ट के जरिए उनका करियर संवार रहे हैं।


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विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल को आमतौर पर मुस्लिम विरोधी माना जाता है, लेकिन त्रिपाठी ने साबित किया है कि ये संगठन अल्पसंख्यक समुदाय की बेहतरी के लिए भी काम कर रहे हैं।

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बृजेश त्रिपाठी ने बेहद कम उम्र में ही राजनीति का दामन थाम लिया था। सिर्फ 14 साल की उम्र में राम जन्मभूमि आन्दोलन के जरिए राजनीति में पदार्पण करने वाले त्रिपाठी विश्व हिन्दू परिषद के कई अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित किया है। हिन्दू समाज के अधिकारों के लिए आवाज बुलन्द करने वाले बृजेश त्रिपाठी ने मुसलमानों के उत्थान की बात भी की है और वह इस पर काम भी कर रहे हैं।

विहिप के पूर्णकालिक संगठन मंत्री और बजरंग दल में पूर्व प्रदेश संयोजक रह चुके त्रिपाठी गुरु कृपा नामक एक संस्था भी चलाते हैं, जिसने अब तक 4500 से अधिक मुस्लिम महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। इन महिलाओं को कई हुनर सिखाए जाते हैं, ताकि वे खुद रोजगार का सृजन कर सकें।



बृजेश कहते हैंः

मैं एक तरफ गांधी विचारधारा का समर्थक हूं। वहीं, दूसरी तरफ युवा क्रांतिकारियों का भी भक्त हूं। मेरा मानना है कि महान क्रांतिकारी, शहीद असफाकउल्लाह खां, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रौशन सिंह और राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी जैसे महान क्रांतिकारियों के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता। भारत से जाते समय अंग्रेजों ने भारत में फूट डालो राज करो का जो बीज बोया, उसका खामियाजा आज तक भुगतना पड़ रहा है। सहिष्णुता और बीफ का मुद्दा इसलिए छेड़ा जा रहा है, ताकि भारत को विकास के पथ से भटकाया जा सके।


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देश में जहां एक तरफ असहिष्णुता के आरोप लग रहे हैं, वहीं बृजेश त्रिपाठी जैसे लोग इस बात को साबित कर रहे हैं कि जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल अलग है।

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इस देश में असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं है। यहां सभी धर्मों के लोग शांति से जीवन व्यतीत कर सकते हैं।


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फोटो साभारः भास्कर

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