इस शिव मंदिर के गुंबद की छाया नहीं पड़ती है ज़मीन पर, वास्तुकला की है शानदार मिसाल

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Updated on 28 Feb, 2017 at 7:18 pm

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तमिलनाडु में स्थित बृहदेश्वर मंदिर अपनी भव्यता और वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। तंजावुर के इस मंदिर के निर्माण कला की एक विशेषता यह है कि इसके गुंबद की छाया जमीन पर नहीं पड़ती है।

यह अब भी वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्य का विषय है।

इस मंदिर को कुछ वर्ष पहले यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था।

इतिहास के साक्ष्यों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण करवाया था राजाराज चोल-I ने। कहा जाता है कि यह मंदिर 1010 में पूरी तरह बन कर तैयार हुआ था।

चोल राजवंश के शासनकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम काल भी कहा जाता है।


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इस मंदिर के निर्माण में 1,30,000 टन ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया था।



यह आश्चर्य का विषय है कि उन दिनों इतनी बड़ी मात्रा में ग्रेनाइट पत्थर कहां से लाया गया होगा, क्योंकि यहां से सौ-सौ किलोमीटर दूर तक भी ग्रेनाइट के खान नहीं हैं।

यही नहीं, ग्रेनाइट के इन पत्थरों पर सुन्दर नक्काशी की गई है, जो अद्भुत है।

मंदिर के शिखर पर स्वर्णकलश स्थित है। जिस पत्थर पर यह कलश स्थित है, उसका भार अनुमानतः 80 टन के करीब है।

इसकी खास बात यह है कि यह एक ही पाषाण से बना हुआ है। मंदिर में स्थापित विशाल, भव्य शिवलिंग को देखने पर उनका बृहदेश्वर मंदिर नाम सर्वथा उपयुक्त प्रतीत होता है।

यह अपने समय के विश्व के विशालतम संरचनाओं में गिना जाता था।


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