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भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित है ब्रह्मोस II सुपरसोनिक मिसाइल

7:06 pm 2 Nov, 2017

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हाल के दिनों में आपने ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के बारे में ढेर सारी बातें सुनी और पढ़ी होंगी। यह दुनिया की सबसे तेज पोत रोधी सुपरसोनिक मिसाइल है। इसकी रफ्तार 2.8-3.0 मैक, है जो इसे खास बनाती है। हालांकि, ब्रह्मोस के नए वर्जन के बारे में एक खास बात है, जो इसे दुनिया के तमाम मिसाइलों से अलग बनाती है। ब्रह्मोस II मिसाइल भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित है। ब्रहमोस एयरोस्पेस के संस्थापक तथा इसरो के अवैतनिक प्रोफेसर और डीआरडीओ के पूर्व मुख्य नियंत्रक पदमभूषण ए.एस. पिल्लई का कहना है कि सुपरसोनिक ब्रह्मोस II को इस तरह तैयार किया गया है कि यह दुश्मन को तहस-नहस कर एक बार फिर उपयोग के लिए वापस अपने ठिकाने पर लौट सकती है।

ब्रह्मोस मिसाइल भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित है।

सुदर्शन चक्र के बारे में मान्यता है कि भगवान कृष्ण का यह हथियार बेहद मारक है। इसमें दुश्मन को नष्ट कर वापस आने की काबीलियत है।

मथुरा के जीएलए विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पिल्लई ने कहाः

“सुपरसोनिक मिसाइलों के बाद भारत अब हाइपरसोनिक मिसाइलों पर काम कर रहा है। यह तकनीक सुपरसोनिक मिसाइलों से 9 गुना अधिक शक्तिशाली होगी। दुनिया की कोई भी सर्च डिवाइस इस मिसाइल को लोकेट नहीं कर सकेगी। हम लोग इसे दोबारा उपयोग में लायक बनाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं।”

ब्रह्मोस को जल, थल आकाश कहीं से भी दागा जा सकता है।


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इसरो में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की टीम के सदस्य रहे वैज्ञानिक ने बतायाः

“इस प्रक्षेपास्त्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि इसका संचालन केवल सोचने भर से किया जा सकेगा। इससे इस प्रक्षेपास्त्र, इसके प्रोग्राम अथवा संचालन करने वाले कम्प्यूटर को किसी भी अत्याधुनिक डिवाइस के सहारे खोजा नहीं जा सकेगा।”

पिल्लई ने देश के दूसरे परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

पूर्व राष्ट्रपति से सम्मान ग्रहण करते हुए पिल्लई।

उन्होंने कहा कि शांतिप्रिय कार्यों में परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर बिजली पैदा करने के मामले में हीलियम-3 नामक ऐसा पदार्थ खोजा गया है जो यूरेनियम के समान रेडियो एक्टिव भी नहीं है और पर्यावरण अथवा जीव-जंतुओं को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बिना पूरे देश की जरूरत आसानी से पूरी कर सकता है।

पिल्लई पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सहयोगी रह चुके हैं।

पिल्लई ने स्वदेशी आयुध निर्माण पर जोर दिया साथ ही दावा किया कि मेक इन इंडिया का सपना पूरी तरह पूरा होगा।

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