नीले रंग को मानते हैं दुःख और तकलीफ का कारण, इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं कई कहानियां

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Updated on 23 Jan, 2017 at 9:23 pm

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हमारे आस-पास रंगों का जो समावेश है, उसका असर हमारे मनोविज्ञान पर पड़ता है। हर किसी का अपना एक पसंदीदा रंग होता ही है और कुछ रंग ऐसे भी होंगे, जो आपको बिलकुल भी पसंद नहीं होंगे। वहीं, कहा गया है कि रंगों की मौजूदगी इंसान के व्यवहार को भी प्रभावित करती है। ऐसे में हाल ही में जो एक रिपोर्ट आई है, उसमें नीले रंग को दुःख और तकलीफ का प्रतीक बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, नीला रंग हमारे स्वभाव में नकारात्मक प्रभाव डालता है। एक नजर ऐसे कारणों पर जो ऐतिहासिक दृष्टिकोण से नीले रंग को दुःख का प्रतीक करार देते हैं।

ग्रीक पौराणिक कथाएं

ग्रीक पौराणिक कथाओं में नीले रंग का संबंध बारिश से जोड़ा गया है। ऐसी कथाओं के अनुसार, जब भी ईश्वर नाराज होते हैं, तो धरती पर प्रलय और तूफान का संकट आता है और जब वे दुःखी होते हैं तो उनके आंखों से बहे आंसू, धरती पर बारिश का कारण बनते हैं। इस तरह से नीले रंग को विलाप की भावना से जोड़कर देखा गया है।

महान कवि की यह पंक्ति

1835 में जेफ्री चौसर द्वारा लिखी गई एक कविता की पंक्ति ‘Wyth teres blewe and with a wounded herte’ यह बताती है कि “नीला रंग केवल तकलीफ़, दुःख और दर्द देने वाला होता है।”


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नीले रंग का शैतानी आत्माओं से संबंध

1785 में आई ‘A Classical Dictionary of the Vulgar Tongue’ नाम की किताब में नीले रंग को उदासी और तकलीफ का कारण बतलाया गया है। वहीं, शैतानी आत्माओं से भी इसका संबंध होने की बात कही गई है।

भावनाओं को उत्तेजित करता है नीला रंग

Dictionary of Americansms (1848) में नीले रंग को भावनाओं को उत्तेजित करने वाला रंग बताया गया है।



ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में भी नीले रंग का सन्दर्भ

ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक, नीले शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी शब्द ‘ब्लो’ से हुई है। ऐसे में जब भी हमारा शरीर ‘ब्लो’ करता है तो शरीर का रंग नीला होना शुरू हो जाता है। यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी और जुकाम की स्थिति होने का संकेत देता है। इस तरह की परिस्थितियां किसी भी तरीके से खुशी देने वाली नहीं हो सकती।

समुद्री यात्राएं

समुद्र में आए दिन यात्रा करने वाले नाविक भी नीले रंग को शुभ नहीं मानते। यात्रा से लौटते समय और यात्रा के दौरान जहाज का कोई अन्य साथी लापता हुआ हो तो जहाज़ की पतवार पर नीले रंग का झंडा लगा दिया जाता है।

रंगों के विज्ञान की बात करें तो इसके अनुसार कहा गया है कि जब नीले रंग को ज़्यादा गहरा किया जाता है, तो यह काले रंग में बदल जाता है। काले रंग को भी अधिकतर सभ्यताओं और संस्कृतियों में शोक और तकलीफ़ से जोड़ा गया है।


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