विश्व कप का ‘हीरो’ रहा यह खिलाड़ी आज भैंस चराने को है मजबूर, दयनीय हो गई है हालत

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Updated on 28 Feb, 2018 at 3:09 pm

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भारतीय टीम की नीली जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना हर किसी खिलाड़ी का सपना होता है। यह एक ऐसी भावना होती है जिसे शब्दों में कोई बयां नहीं कर सकता, बस एक गौरवान्वित एहसास के जरिए इसे महसूस किया जा सकता है।

हमारे देश में क्रिकेट का जुनून लगभग हर किसी के सिर चढ़ कर बोलता है। ऐसे में किसी भी क्रिकेटर के लिए विश्वकप में देश का प्रतिनिधित्व करना एक सपने का साकार होने जैसा होता है।

आज हम एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे, बल्कि वह टूर्नामेंट के हीरो भी साबित हुए। लेकिन आज उसी हीरो की दयनीय हालत के बारे में जानकर आपका दिल पसीज जाएगा।

 


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एक तरफ जहां महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी अपनी ताबड़तोड़ कमाई से धनकुबेरों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। वहीं, एक खिलाड़ी ऐसा भी है जो अपनी तंगहाली के चलते आजकल भैंस चराकर अपना गुजारा कर रहा है।

 

 

हम ऐसे भारतीय क्रिकेटर की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भारत के लिए सबसे अधिक विकेट लिये हैं और कई रिकार्ड भी अपने नाम दर्ज किए हैं। इस खिलाड़ी के शानदार खेल को देखकर साथी क्रिकेटर उन्‍हें सचिन तेंदुलकर कहकर बुलाया करते थे। यहां हम जिस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं उनका नाम है भालाजी डामोर।

1998 वर्ल्ड कप में भालाजी ने एक ऑलराउंडर के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इस खिलाड़ी के बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत भारत सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में कामयाब हुआ था। ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप-1998 के भालाजी हीरो साबित हुए थे। ऑलराउंडर रहे भालाजी के नाम नेत्रहीन क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट (150) लेने वाले गेंदबाज का रिकॉर्ड दर्ज है।

 

 



गुजरात के एक साधारण से किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले नेत्रहीन 38 वर्षीय भालाजी को उम्मीद थी कि विश्वकप के बाद उनकी जिंदगी में कुछ सुधार आएगा, लेकिन दुर्भाग्य से विश्वकप 1998 के 18 सालों बाद भी आज यह खिलाड़ी एक-एक पैसे का मोहताज है।

 

पत्नी व बच्चे के साथ भालाजी डामोर indiatimes

 

कभी तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने भी उनके प्रदर्शन की तारीफ और जज्बे की सराहना की थी। आज वही खिलाड़ी खेतों में भैंस चराकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। उनकी पत्नी अनु भी खेत के काम में उनका हाथ बटाती हैं।

 

 

अपनी इस दशा पर भालाजी का कहना है कि गुजरात सरकार ने उनकी प्रशंसा जरूर की, लेकिन उन्हें अब तक एक अदद नौकरी नहीं दी।

 

 

बहरहाल, जहां एक तरफ क्रिकेट खिलाड़ियों को खूब सारी दौलत और शोहरत मिलती है, वहीं भालाजी जैसे प्रतिभाशाली क्रिकेटर को अपनी तमाम प्रतिभाओं के बावजूद करियर समाप्त होने के बाद एक सम्मानजनक जिंदगी जीने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है।


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