डॉलर से महंगा हुआ भारत का रुपया, बढ़ रही है कालाबाजारी

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Updated on 12 Oct, 2016 at 9:25 pm

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वर्ष 2015 में एक रुपए के नए नोट के चलन में आने के बाद इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है।

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भारत सरकार ने वर्ष 1994 में एक रुपए के नोट की छपाई बंद कर दी थी। लेकिन इसे एक बार फिर शुरू किया गया है। माना जा रहा है कि इस नोट की खूबसूरती की वजह से यह लोगों को भा रहा है और लोग इसकी जमाखोरी करने लगे हैं।

एक नोट की छपाई की लागत आती है एक रुपए 14 पैसे की। जबकि दिल्ली के बाजारो में ये नोट चार से पांच रुपए में बिक रहा है। इसे खुलेआम ब्लैक में बेचा जा रहा है।

जहां तक इन्टरनेट की बात है तो यहां एक रुपए करेन्सी का बंडल 700 से 800 रुपए के बीच मिल रहा है। वहीं, एक अन्य अॉनलाइन पोर्टल पर एक रुपए को 99 रुपए में बेचने की बात कही जा रही थी।

एक रुपए की कालाबाजारी का आलम यह है कि वर्ष 1991 के नोटों के बंडल की कीमत ढ़ाई लाख रुपए रखी गई है।

कई ऑनलाइन पोर्टल्स एक रुपए के नोट को 49 रुपए में बेच रहे हैं। शिपिंग के नाम पर 50 रुपए अलग से वसूले जा रहे हैं। इस तरह एक रुपए की कीमत हो जाती है 99 रुपए।

मजे की बात यह है कि इन नोटों पर आरबीआई गर्वनर के दस्तख्वत भी नहीं हैं। इस पर तात्कालीन वित्त सचिव राजव महर्षि के हस्ताक्षर हैं।

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Source: Suno


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