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BJP सांसद ने आखिर ऐसा क्या किया कि इस ‘भक्त’ कार्यकर्ता ने उनके पैर धोकर वही पानी पी लिया

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12:44 pm 18 Sep, 2018

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झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक तस्वीर और वीडियो को लेकर जमकर ट्रोल हो रहे हैं। वीडियो में पार्टी का एक कार्यकर्ता उनका पैर धोकर पानी पीता दिख रहा है। हैरानी की बात तो ये है कि सांसद ने कार्यकर्ता को न तो ऐसा करने से रोका, बल्कि विवादों में घिरने के बाद इसकी तुलना द्वापर युग में कृष्ण और सुदामा से कर दी।

आपको बता दें कि 16 सितंबर को गोड्डा जिले में कझिया नदी पर बने पुल का शिलान्यास हो रहा था। सांसद निशिकांत दुबे शिलान्यास समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ता पवन कुमार साह ने सांसद के सम्मान में कसीदे पढ़ते हुए कहा कि पुल का शिलान्यास कर सांसद ने बहुत बड़ा उपकार किया है।

कार्यकर्ता ने बताया कि 2009 में निशिकांत दुबे ने कझिया नदी पर पुल बनाने का वादा किया था। तब उन्होंने कसम खाई थी जब भी सांसद का ये वादा पूरा होगा वो उनके पैरों को पानी से धोकर उसी जल को पिएंगे। फिर क्या, उसी वादे को पूरा करते हुए कार्यकर्ता ने थाली और पानी मंगाकर सांसद के पैर धोने शुरू कर दिए। सांसद ने भी बिना किसी हिचक अपने पैर आगे बढ़ा दिए। इतना ही नहीं कार्यकर्ता पैर धोने के बाद पानी चरणामृत की तरह पी गया।

BJP worker drank contaminated water -बीजेपी कार्यकर्ता ने पिया पैर धोया हुआ गंदा पानी

सोशल मीडिया पर इस वाकये की तस्वीर और वीडियो वायरल होने के बाद सांसद निशिकांत की जमकर आलोचना होने लगी। खुद सांसद ने अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट करते हुए लिखा।

 

“आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूँ ,भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की ख़ुशी में हज़ारों के सामने पैर धोया व उसको अपने वादे पुल की ख़ुशी में शामिल किया,काश यह मौक़ा मुझे एक दिन माता पिता के बाद मिले, मैं भी कार्यकर्ता ख़ासकर पवन जी का चरणामृत पियूँ । जय भाजपा जय भारत।”

 

 

मामला तुल पकड़ता देख बीजेपी सांसद ने घंटे भर बाद ही फेसबुक पर एक और पोस्ट डाला और सफाई देते नज़र आए। सांसद निशिकांत ने लिखा-


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“अपनो में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ?उन्होंने जनता के सामने क़सम खाया था,उनको ठेस ना पहुंचे सम्मान किये। पैर धोना तो झारखंड मेंअतिथि के लिए होता ही है, सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएँ क्या यह नहीं करती हैं?इसे राजनितिक रंग क्यूं घस रहे हैःपैर अतिथि का धोना गलत है,अपने पुरखो से पुछीये ,महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया था? लानत है घटिया मानसिकता पर।”

इसके बाद भी जब विवाद थमता नहीं दिखा तो निशिकांत दुबे ने जाति का कार्ड खेल दिया। अपने तीसरे फेसबुक पोस्ट में लिखा-

 

“क्या मैं अपने मां पिताजी को बदल दूं? क्या मैं जाति से ब्राह्मण हूं, इसलिए मेरे साथ मेरे मॉं पिताजी गाली के हकदार हैं? किसी ने पीया या नहीं पिया मैंने अपने शिक्षक बेचू नारायण सिंह जो जाति से कुरमी थे उनका पॉव धोकर पीया है? किसी दिन पवन जैसे कार्यकर्ताओं का चरणामृत लेने का सौभाग्य मुझे मिलेगा क्योंकि उन जैसे लोगों के कारण ही मैं जनता के बीच ज़िन्दा हूं।”

 

 

वहीं इस मामले पर विपक्ष ने भी बीजेपी सांसद को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी के नेता अंहकार में अपने आप को भगवान मानने लगे हैं। अमित शाह और नरेंद्र मोदी को इस पर जवाब देना चाहिए।

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