क्या भारतीय जनता पार्टी भी मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है?

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Updated on 29 Sep, 2016 at 4:02 pm

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केरल के कोझिकोड में भारतीय जनता पार्टी के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि मुसलमानों को वोट बैंक न समझा जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम समुदाय के उत्थान और उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ने की बात कही।

इस वाकये के कुछ ही दिन बाद केन्द्र सरकार ने देशभर में मुस्लिम पंचायत आयोजित करने का फैसला किया है। इन पंचायतों को प्रोग्रेस पंचायत का नाम दिया गया है। इसकी शुरुआत बीफ बिरयानी से हाल ही में चर्चा में आए हरियाणा के मेवात इलाके से की जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी के बयान के आलोक में करीब 100 से अधिक मुस्लिम पंचायत के आयोजन पर कहा जा रहा है कि कभी मुस्लिम तुष्टीकरण पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब खुद इसी राह पर आगे बढ़ रही है।

कांग्रेस पार्टी पर पहले से ही मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं।


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हालांकि, भाजपा सूत्रों का कहना है कि सरकार का मकसद साफ है। मुस्लिम पंचायत जैसे अभियन के माध्यम से सरकार मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए खुद उनके दरवाजे तक चलकर आई है। पंचायत की बैठक से पहले ही स्कूल, अस्पताल, संस्थान का उदघाटन भी कर सकती है।

वहीं, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह भाजपा के राजनीतिक इमेज मेकओवर की कोशिश मात्र है।

भाजपा को इसकी स्थापना से ही दक्षिणपंथी राजनीतिक दल के रूप में जाना जाता रहा है और मुसलमानों के लिए यह पार्टी अछूत रही है। अब तमाम कवायद मुसलमानों को रिझाने के लिए है। कोशिश यह है कि मुसलमानों में यह संदेश भेजा जाए कि भाजपा उनके लिए अछूत नहीं है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा की इस कवायद का लाभ पार्टी को कितना मिलेगा, इसका पता चुनावों नतीजों से ही पता चलेगा।

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