परीक्षा के दिन पता चला कि प्रश्नपत्र तो छपा ही नहीं, बिहार के विश्वविद्यालय का कमाल

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Updated on 15 Apr, 2017 at 3:54 pm

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पेपर लीक होने या नकल होने के कारण पेपर कैन्सिल होने की खबरें तो आपने बहुत सुनी होगी, लेकिन इस बार कुछ अलग ही मामला सामने आया है।

बिहार की तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी में एमए हिंदी के दूसरे सेमेस्टर की आखिरी परीक्षा होनी थी, पर छात्र परीक्षा नहीं दे पाए।दरअसल, पोस्ट ग्रैजुएशन एमए हिंदी के 94 छात्र दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन एक अजीबोगरीब कारण की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा।  ऐसा कारण जो शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा।

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असल में यूनिवर्सिटी इस परीक्षा के प्रश्नपत्र छापना भूल गई। बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र प्रिंट कराने के लिए भेजे ही नहीं गए थे।


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एक अखबार के हवाले से कहा गया है कि यून‍िवर्सिटी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्टाफ को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर दिया है। अब इस परीक्षा की अगली तारीख इसी महीने की 22 अप्रैल को तय की गई है।

बिहार ने भले ही देश को कई आईएस, आईपीएस ऑफिसर दिए हों, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि दिन-ब-दिन राज्य में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। बिहार में शिक्षा स्कूली हो या फिर विश्वविद्यालय की, व्यवस्था में ढील देखने को मिल रही है।

पिछले साल का टॉपर्स घोटाला तो आपको याद ही होगा कि किस तरह से बड़ा घोटाला कर रूबी राय को टॉपर बना दिया गया। वो तो शुक्र है ‘प्रोडिकल साइंस’ का, जिसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में धांधली की पोल खोलकर रख दी।

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