चिटफंड कंपनी नहीं चली तो कर ली पढ़ाई और बन गया टॉपर

Updated on 2 Jun, 2017 at 11:50 am

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बिहार का टॉपर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा परिणाम निकलने के बाद दो दिनों तक गायब रहने के बाद गणेश कुमार जब सामने आया तो विवाद भी साथ लेकर आया। इंटर में आर्ट्स विषयों के साथ टॉप करने वाले गणेश को मामूली सवालों के जवाब नहीं मालूम थे, जो कई सवाल खड़े कर गए।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की पिछले साल से ही रिजल्ट को लेकर किरकिरी हो रही है।

आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार को यह नहीं पता है कि गद्य और पद्य में क्या अंतर है? उसे यही भी नहीं पता है कि सुर-ताल में क्या फर्क है? जब हम जोर से और धीरे बोलते हैं, तो उसे ही सुर-ताल कहते हैं। गणेश को हिंदी में 100 में 92 और संगीत में 100 में 83 अंक मिले हैं।

इस बीच, बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने गणेश कुमार के साथ खड़े रहने की बात कही है।

बिहार विद्यालय शिक्षा परिषद ने भी गणेश को क्लीन चिट दी है।


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अब जो मीडिया रिपोर्ट्स में बात कही जा रही है, वह हैरान करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गणेश कुमार वर्ष 2009 से 2014 तक झारखंड के गिरिडीह स्थित सरिया में चिट-फंड कंपनी चलाता था। घाटा होने के बाद गणेश कुमार अपना शहर छोड़ कर समस्तीपुर आ गया। यहां ट्यूशन करना शुरू किया। फिर पढ़ाई करने की सोची। उसने संजय गांधी हाइस्कूल, लक्षमिनिया, शिवाजीनगर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद रामनंदन सिंह जगदीप नारायण उच्च माध्यमिक इंटर कॉलेज, चकहबीव से इंटर की परीक्षा दी।


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मानें तो इस बार सारे टॉपर की उत्तर पुस्तिका की पूरी जांच हुई थी। इसी आधार पर रिजल्ट निकाला गया है। गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। समिति के अनुसार गणेश के सारे विषयों में अंक सही हैं। गणेश कुमार को हिंदी, एनआरबी, संगीत, इतिहास और समाजशास्र में डिस्ट्रिंग्शन अंक प्राप्त हुए हैं। हिंदी में 92, एनआरबी में 78, म्यूजिक में 83, इतिहास में 80 और समाजशास्त्र में 80 अंक आये हैं। लेकिन, मनोविज्ञान में गणेश कुमार को सिर्फ 59 अंक आये हैं। मनोविज्ञान की थ्योरी में सिर्फ पास मार्क्स 33 में 33 आये हैं। वहीं 67 अंक के प्रैक्टिकल में उसे 26 अंक प्राप्त हुए हैं।

हालांकि, गणेश कुमार की योग्यता और परीक्षा परिणाम में कोई तालमेल नहीं दिख रहा है।

गणेश कुमार जिसरामनंदन सिंह जगदीप नारायण उच्च माध्यमिक इंटर काॅलेज, चकहबीव में नामांकन लिया, वह तीन कमरों में चलता है। उस कॉलेज में न तो क्लास होती है और न ही पढ़ाई ही ढंग से होती है। बताया जाता है कि गणेश कुमार ने कभी क्लास भी नहीं की। बस नामांकन करवाया और पढ़ाई करता रहा। बिना कॉलेज में पढ़ाई किये और टीचर्स के संपर्क में रहे गणेश कुमार टॉपर बन गया है। सवालों से शुरू हुआ सिलसिला सवाल पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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