Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

बिहार में नीतीश और लालू के लौटने का मतलब

Updated on 9 November, 2015 at 11:41 pm By

बिहार में विधानसभा चुनाव नतीजों के 48 घंटे से अधिक बीत चुके हैं। इस राज्य की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की वापसी के कई निहितार्थ हैं। राजनीतिक पंडितों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस जीत को सुशासन के पक्ष में जनता का फैसला बताया है। साथ ही इस बात के दावे किए जा रहे हैं कि बिहार में जातिगत समीकरण ध्वस्त हो गए हैं और जनता ने जातीय गोलबंदी को अधिक तवज्जो नहीं दी है। राजनीति पंडितों के ये दावे सच्चाई से बहुत दूर हैं।

1. बिहार में जातीय समीकरण की जीत


Advertisement

इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि बिहार ने इन चुनावों में जातीय समीकरण पूरी तरह हावी रहा। विकास और सुशासन सिर्फ हवाई बातें थीं। जो लोग यह दावे कर रहे हैं कि बिहारी मतदाताओं ने नीतीश के सुशासन के पक्ष में मतदान किया है, वे इस सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं कि 116 सीटों वाली जनता दल-युनाईटेड को 71 सीटों पर समेट दिया गया है। इस पार्टी को 45 सीटों का नुकसान हुआ है।

और इसी तरह लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने 25 से 80 सीटों का सफर तय किया है। लालू यादव जैसे घोर जातिवादी राजनीति के धुरन्धर, जिन्होंने नतीजों के ठीक एक दिन पहले बड़े ही ठाठ से कहा था कि वोटिंग के दौरान अपर कास्ट भोथर हो गया था, विकास पुरुष कब से हो गए?

2. नीतीश की चुनौतियां बढ़ीं

बहरहाल, नीतीश कुमार की चुनौती बढ़ गई है। वह ऐसे सरकार में मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, जहां उनकी पार्टी की सीट कम है। कुल मिलाकर बिहार सरकार का रिमोट कन्ट्रोल लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के पास होगा।

बिहार के लिए लालू राज के 15 साल का अनुभव कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में नीतीश अपनी मर्जी का कितना कर सकेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा।

3. मोदी-अमित शाह के लिए सबक



बिहार चुनाव के नतीजे नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के लिए सबक है। केन्द्रीय राजनीति के लिए यह जोड़ी सर्वोत्तम है, लेकिन जहां तक राज्य की राजनीति की बात तो उन्हें सभी राज्यों में अगरी पंक्ति के नेताओं को तैयार करना होगा, जो सक्षम हों और सशक्त हों।

संगठन और काम काज में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत होगी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के लिए संघ और इसके अनुषांगिक संगठनों के साथ तालमेल रखना एक चुनौती होगी।

4. केन्द्र और बिहार में तालमेल का अभाव


Advertisement

यह बिहार का दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद से ही केन्द्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल का अभाव रहा है। जब इन्दिरा गांधी का शासनकाल था, तब बिहार में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन चलाए जा रहे थे। इसी तरह अटल बिहारी वाजयपेयी के कार्यकाल में बिहार में लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे, जिनकी वाजपेयी सरकार से बनती नहीं थी।

डॉ. मनमोहन सिंह के दस साल के कार्यकाल के दौरान यहां जनता दल युनाईटेड और भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। राज्य में इस सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे। और अब जब केन्द्र में भाजपानीत सरकार है, तब बिहार में लालू यादव की वापसी हो रही है।


Advertisement

कुल मिलाकर आने वाले दिनों में बिहार में विकास की संभावना को खोजना मुश्किल है।

Advertisement

नई कहानियां

WAR Full Movie Leaked Online to Download: Tamilrockers पर लीक हो गई WAR, एचडी प्रिंट डाउनलोड करके देख रहे हैं लोग!

WAR Full Movie Leaked Online to Download: Tamilrockers पर लीक हो गई WAR, एचडी प्रिंट डाउनलोड करके देख रहे हैं लोग!


Tamilrockers पर लीक हुई ‘छिछोरे’, देखने के साथ फ्री में डाउनलोड कर रहे लोग

Tamilrockers पर लीक हुई ‘छिछोरे’, देखने के साथ फ्री में डाउनलोड कर रहे लोग


Sapna Choudhary Songs: सपना चौधरी के ये गाने किसी को भी थिरकने पर मजबूर कर दें!

Sapna Choudhary Songs: सपना चौधरी के ये गाने किसी को भी थिरकने पर मजबूर कर दें!


जानिए कैसे डाउनलोड करें YouTube वीडियो, ये है आसान तरीका

जानिए कैसे डाउनलोड करें YouTube वीडियो, ये है आसान तरीका


प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरा होगा ख़ुद के घर का सपना, जानिए इससे जुड़ी अहम बातें

प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरा होगा ख़ुद के घर का सपना, जानिए इससे जुड़ी अहम बातें


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें People

नेट पर पॉप्युलर