भोपाल की छात्रा ने इजाद की सस्ती बिजली तकनीक

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Updated on 17 Feb, 2016 at 7:25 pm

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भोपाल की एक इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट ने कम कीमत पर बिजली बनाने का तरीका इजाद कर डाला है।

नैंसी वर्मा ने कर दिखाया कमाल

नैंसी वर्मा भोपाल के राधारमण इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी में बीई फोर्थ ईयर की स्टूडेंट हैं। नैंसी ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे बेहद सस्ती बिजली तैयार की जा सकती है। नैंसी ने जो टेक्नोलॉजी इजाद की है, उसमें पानी से बिजली बनाई जाती है, लेकिन यह पुरानी टेक्नोलॉजी से अलग और बेहतर है।

नैंसी के इस मॉडल के पेटेंट को भारत सरकार ने भी मंजूरी दे दी है। अगर नैंसी के इस मॉडल के आधार पर बिजली का निर्माण किया जाए, तो उसकी कीमत कम होकर 50 पैसे प्रति यूनिट तक आ सकती है।


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बांध की ज़रूरत नहीं होगी

अभी तक जहां बिजली बनाने के लिए बड़े-बड़े बांध बनाने की जरूरत होती है, अगर नैंसी की इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए, तो भविष्य में बाँध की जरूरत नहीं होगी।

23 वर्षीया नैंसी के मुताबिक उन्होंने अपनी थ्योरी में छह मीटर आकार के एक जैसे चार रिजरवायर टैंक का इस्तेमाल किया है। पहले टैंक के ऊपरी हिस्से में एक रैम लगाई गई है, जो बाहरी प्रेशर पैदा करती है। इस टैंक से पानी टरबाइन पर जाकर गिरता है और टरबाइन घूमने लगती है। इससे बिजली पैदा होने लगती है। टरबाइन को टैंक से दो मीटर की ऊंचाई पर लगाया गया है।



इस टेक्नोलॉजी से ऐसे तैयार होगी बिजली

इस टेक्नोलॉजी में लगातार चलने वाली प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया है। अभी तक जो बाँध में जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें पानी का उपयोग एक बार से अधिक नहीं किया जा सकता है, लेकिन नैंसी के इस टेक्नोलॉजी में पानी का इस्तेमाल कई बार किया जा सकता है।

नैंसी ने बताया कि टरबाइन से टकराने के बाद पानी दूसरे टैंक में चला जाता है। फिर पहले टैंक वाली प्रक्रिया दूसरे टैंक में आरंभ हो जाती है। इस तरह पानी तीसरे और फिर चौथे टैंक में जाता है और यही प्रक्रिया जारी रहती है। चौथे टैंक से पानी फिर पहले टैंक में आ जाता है।

नैंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया से बांध के मुकाबले चार गुना ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है।

मॉडल का नाम है आरएमएन हाइड्रो पावर प्लांट

फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, इस मॉडल को आरएमएन हाइड्रो पावर प्लांट का नाम दिया गया है। इस डिजाइन से बिजली बनाने में आने वाली बहुत सी मुश्किलों को आसान किया जा सकता है।जहां बांधों के निर्माण में बहुत अधिक ज़मीन की अवश्यकता होती है, वही इस मॉडल से बिजली बनाने में मात्र 1000 वर्गमीटर जमीन की ज़रूरत पड़ेगी।


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