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डॉ. भीमराव आम्बेडकर से जुड़े इन 10 अनजाने तथ्यों के बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे

Updated on 6 December, 2016 at 1:36 pm By



डॉ. भीमराव अाम्बेडकर का नाम दुनिया के श्रेष्ठतम संविधान के रचनाकार और महान अर्थशास्त्री के रूप में लिया जाता है। आजीवन छुआछूत और अन्य सामजिक बुराइयों के खिलाफ जंग लड़ने वाले अाम्बेडकर के जन्मदिन पर हम आपके लिए लेकर आए हैं उनसे जुड़े 10 ऐसे तथ्य जिनके बारे में आपको शायद ही पता हो।

1. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अाम्बेडकर सरनेम ‘अम्बावडेकर’ से बना है, जो एक ब्राह्मण उपनाम या उपाधि है। असल में डॉ. अाम्बेडकर अपने ब्राह्मण शिक्षक महादेव अाम्बेडकर के समानता के विचारों से काफी प्रभावित थे। इसलिए उनके सम्मान में उन्होंने ‘अाम्बेडकर’ कुलनाम को अपना लिया।

2. वर्ष 2005 में संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान् चामू कृष्ण शास्त्री जी के अनुसार बाबा साहब अम्बेडकर भारत की आधिकारिक भाषा “संस्कृत” रखना चाहते थे। उनका मानना था कि संस्कृत केवल उच्च तबके की भाषा नहीं है। इस पर सभी भारतीयों का समान अधिकार है। हालांकि, इसका कोई लिखित प्रमाण अभी तक नहीं मिल सका है।

3. डॉ. अाम्बेडकर के पिता पूरी तरह शाकाहारी थे। बाद के वर्षों में भी उनका पूरा परिवार शाकाहारी रहा। आज के परिवेश में जहां तथाकथित उच्चवर्गीय लोग गौ-मांस के लिए उपवास कर रहे हैं, वहीं अाम्बेडकर वाकई अनुकरणीय हैं।

4. डॉ. भीमराव अाम्बेडकर की दूसरी पत्नी सविता अाम्बेडकर सारस्वत ब्राह्मण थीं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में एक ब्राह्मण महिला के साथ जीवन-यापन करना इस बात का साफ संकेत है कि बाबा साहब ब्राह्मणों के विरोधी नहीं थे। वह विरोधी थे, तो सिर्फ जातिगत असमानता के। बाबा साहब जीवन भर राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकता के पक्षधर रहे थे।

5. पंडित जवाहरलाल नेहरू अाम्बेडकर को लोकसभा में आने से रोकना चाहते थे। वर्ष 1952 और वर्ष 1954 चुनावों में उनके खिलाफ कांग्रेस ने कड़े प्रतिद्वंदी उतारे, जिससे वे हार गए। राज्य सभा में भी प्रवेश उन्हें कांग्रेस की तरफ से नहीं, बल्कि जनसंघ के माध्यम से मिला था।

6. डॉ. अाम्बेडकर ने वीर सावरकर की जाति व्यवस्था को ख़त्म करने की मुहिम को अपना समर्थन प्रदान किया। वह ब्राह्मणों और सवर्णों के संगठन के रूप में बदनाम किए जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्व के खिलाफ कभी नहीं थे। वह अक्सर संघ की शाखाओं और शिविरों का भ्रमण भी करते रहे।

7. बाबा साहब अाम्बेडकर आजीवन साम्यवाद के धुर विरोधी रहे। उनके अनुसार साम्यवाद का भारतीय ढांचा दलितों और पीड़ितों का सिर्फ राजनीतिक फ़ायदा उठाने का काम कर सकता है। इसके अलावा वह यह भी मानते थे की कम्युनिज्म के सहारे भारत की प्रगति कभी नहीं हो सकती।

8. इस्लाम के प्रति अपने लेखों और विचारों को लेकर बाबा साहब काफी विवादों में भी रहे। अपनी पुस्तकों और लेखों में वे कई बार जिक्र करते रहे कि मुस्लिम समाज में कुरीतियां, हिन्दू समाज से कहीं अधिक हैं।

9. बहुविवादित अनुच्छेद-370 की सबसे पहली आलोचना बाबा साहब ने ही की थी। संसद के पटल पर कश्मीर मामले में वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की राय का खुला विरोध करने वाले पहले व्यक्ति थे।

10. डॉ. अाम्बेडकर ने बहुत पहले ही पंडित जवाहरलाल नेहरू को चीन से सावधान रहने की सलाह दी थी। वह तत्कालीन भारत सरकार की पंचशील और तिब्बत नीति से सहमत नहीं थे। कालांतर में चीन के प्रति उनकी आशंका अक्षरशः सत्य साबित हुई।

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