1944 में गांधीजी की जान बचानेवाले स्वतंत्रता सेनानी भिलारे गुरुजी का निधन

Updated on 20 Jul, 2017 at 2:54 pm

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गांधीजी की जान बचानेवाले जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी भीकू दाजी भिलारे का 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 1944 में महात्मा गांधी की जान बचाई थी, जिसके बाद ये चर्चा में आ गए थे।

पंचगनी में जब 1944 में नाथूराम गोडसे ने बापू की हत्या करने की कोशिश की थी तो भिलारे दाजी ने उनकी जान बचाई थी। गोडसे चाकू से वार करने को तैयार था तो भीकू दाजी ने उन्हें रोक दिया था।

एक साक्षात्कार में भिलारे गुरुजी ने कहा था कि पंचगनी में बापू की शाम की प्रार्थना सभा में आने की सबको इजाजत थी, उस दिन उनके साथी उषा मेहता, प्यारेलाल, अरुणा असफ सहित कई लोग मौजूद थे। तभी नाथूराम गोडसे चाकू लेकर बापू की ओर दौड़ा, तभी भिलारे गुरुजी ने उसे रोका और उसके हाथ से चाकू छीन लिया, लेकिन उसे जाने दिया।

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने भी इस बात को माना है कि भिलारे और मणिशंकर पुरोहित ने गोडसे को उसकी योजना में सफल नहीं होने दिया था। वहीं कपूर कमीशन इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ इस बात का उल्लेख किया है कि 1944 में पंचगनी के प्रार्थन कार्यक्रम में सिर्फ कुछ लोगों द्वारा बाधा पहुंचाने की कोशिश की।


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बताया जाता है कि 1944 में गोडसे के एक भाई ने पंचगनी में गांधीजी पर हमले की कोशिश की थी, लेकिन इस हमले को एक युवा ने टाल दिया था। इस बात की जानकारी गांधीजी के करीबी प्यारेलाल ने अपने संस्मरण में भी दर्ज किया है।

गांधीजी की जान बचाकर गुरुजी हीरो बन गए थे। गुरुजी ने गांधीजी की जान बचाई थी, यह खबर काफी तेजी से सतारा में लोगों के बीच फैल गई। गुरुजी ने गांधीजी के सिद्धातों पर ही बेहद सादगी भरा जीवन व्यतीत किया था।

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