चंबल के आखिरी खूंखार डकैत की मुठभेड़ में मौत, 30 साल से बना था आतंक का पर्याय

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Updated on 25 Aug, 2016 at 1:29 pm

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करीब 30 साल से चंबल घाटी में आतंक का पर्याय माने जाने वाला खूंखार डकैत भरोसी मल्लाह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया है। उसके सिर पर 35 हजार रुपए का इनाम था। घटनास्थल से पुलिस ने दो आग्नेयास्त्र बरामद किए हैं।

इस रिपोर्ट में श्योपुर के पुलिस अधीक्षक सुनील पान्डे के हवाले से बताया गया हैः

“चंबल की घाटी में वीरपुर के जंगलों में हमें उसके मौजूद होने की सूचना मिली थी। वह इस इलाके को राजस्थान आने-जाने के रूट के रूप में इस्तेमाल करता रहा था।”

55 वर्षीय भरोसी मल्लाह करीब तीन दशकों से सुरक्षाबलों को छकाता रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भऱोसी एक अच्छा तैराक था। उसने पिछले साल सितम्बर महीने में तेजपाल मल्लाह का अपहरण कर लिया था और 10 लाख रुपए फिरौती की मांग की थी।

भरोसी ने मांग की थी कि उसके भाई भवानी मल्लाह को पुलिस रिहा करे, नहीं तो वह तेजपाल और उसके बेटे सीताराम मल्लाह की हत्या कर देगा। भरोसी का आरोप था कि तेजपाल और उसका बेटा पुलिस के लिए काम करते हैं।


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पुलिस सूत्रों का कहना है कि यहां रह रहे मल्लाह समुदाय के लोगों पर भरोसी का खासा दबदबा था। यही वजह है कि वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर रहा था।

हालांकि, तेजपाल के अपहरण की घटना के बाद मल्लाह समुदाय के लोग अापस में बंट गए। कुछ लोगों ने भरोसी का समर्थन किया, लेकिन समुदाय के लोगों के दबाव में आकर भरोसी ने तेजपाल और उसके बेटे को रिहा कर दिया था।

समुदाय में इस फूट का पुलिस ने फायदा उठाया और भरोसी मल्लाह के बारे में सूचनाएं एकत्र की।

इन्हीं सूचनाओं के आधार पर भरोसी को वीरपुर के जंगलों में घेर लिया गया और मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। उसके चार से पांच साथी भाग निकलने में कामयाब रहे।


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