Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

जानिए भाई-बहनों के लिए भाई दूज क्यों होता है खास

Updated on 11 November, 2018 at 11:28 am By

सनातन धर्मावलंबियों के लिए दुर्गापूजा, दीपावली के साथ पर्वों की श्रृंखला की शुरू हो जाती है। भाई बहन के पवित्र प्रेम का त्यौहार भैया दूज दीपावली पर्व की श्रृंखला का अंतिम पर्व है। इस दिन बहन भाई का तिलक कर उसके दीर्घायु की प्रार्थना करती है। भाई भी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है। बहन देवता की तरह अपने प्यारे भाई की आरती उतरती है।


Advertisement

 

 

कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई-बहन के स्नेह का पर्व भाई-दूज मनाया जाता है, जो दीपावली के दो दिन बाद आता है। इस बार आज ही है ये खास दिन। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। पंडितों की मानें तो ये पर्व मनाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजे से 03 बजकर 30 मिनट तक का है।

 

भाई दूज मनाने के पीछे की कहानी

 

ऐसा माना जाता है भाई दूज के दिन सूर्य पुत्र यम ने अपनी बहन यमुना के घर जाकर भोजन करने के साथ-साथ उपहार भेंट किया था। इसलिए इस पर्व को यम द्वितीया एवं भाई दूज कहा जाता है। इस दिन यम और यमुना की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसा कहा जाता है काम में व्यस्त रहने के कारण यमराज अपनी बहन यमुना से नहीं मिल पाते थे। ऐसे में यमुना ने भाई को आने का सन्देश भेजा। यमराज ने तब सारा काम छोड़कर अपनी बहन यमुना का आतिथ्य स्वीकार किया। आज की भागदौड़ और व्यस्तता के दौर में ये पर्व हमें भाई-बहनों से मिलकर आपसी सम्बन्ध को मजबूत करना सिखाता है।



 

 

इस दिन यमुना स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता। पुराण के अनुसार यमराज ने यमुना को वरदान दिया जो भी व्यक्ति यमद्वितीया के दिन यमुना के जल में स्नान करके बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन करेगा उसकी आयु लंबी होगी।

 

भाई दूज मनाने की विधि

 

पहले बहनें चावल के आटे से चौक बनाती हैं और इस पर भाई को बिठाकर भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाती हैं। इसमें सिंदूर, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर बहन भाई की लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती हैं। इसके बाद भाई की आरती उतार कलावा बांधकर मुंह मीठा कराती है। बहन भाई को इस दिन खाना खिलाती है और भाई उपहार देते हैं। शाम के वक्त बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीपक जलाकर घर के बाहर दीप जलाती हैं। दीप का मुंह दक्षिण दिशा में होना अनिवार्य होता है।


Advertisement

बंगाल, बिहार सहित उत्तर भारत में इसे प्रमुखता से मनाया जाता है।

Advertisement

नई कहानियां

इस शख्स की ओवर स्मार्टनेस देख हंसते-हंसते पेट में दर्द न हो जाए तो कहिएगा

इस शख्स की ओवर स्मार्टनेस देख हंसते-हंसते पेट में दर्द न हो जाए तो कहिएगा


मां के बताए कोड वर्ड से बच्ची ने ख़ुद को किडनैप होने से बचाया, हर पैरेंट्स के लिए सीख है ये वाकया

मां के बताए कोड वर्ड से बच्ची ने ख़ुद को किडनैप होने से बचाया, हर पैरेंट्स के लिए सीख है ये वाकया


क्रिएटीविटी की इंतहा हैं ये फ़ोटोज़, देखकर सिर चकरा जाए

क्रिएटीविटी की इंतहा हैं ये फ़ोटोज़, देखकर सिर चकरा जाए


G-spot को भूल जाइए, ऑर्गेज़्म के लिए अब फ़ोकस करिए A-spot पर!

G-spot को भूल जाइए, ऑर्गेज़्म के लिए अब फ़ोकस करिए A-spot पर!


Eva Ekeblad: जिनकी आलू से की गई अनोखी खोज ने, कई लोगों का पेट भरा

Eva Ekeblad: जिनकी आलू से की गई अनोखी खोज ने, कई लोगों का पेट भरा


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें Culture

नेट पर पॉप्युलर