जानिए भाई-बहनों के लिए भाई दूज क्यों होता है खास

1:49 pm 21 Oct, 2017

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सनातन धर्मावलंबियों के लिए दुर्गापूजा, दीपावली के साथ पर्वों की श्रृंखला की शुरू हो जाती है। भाई बहन के पवित्र प्रेम का त्यौहार भैया दूज दीपावली पर्व की श्रृंखला का अंतिम पर्व है। इस दिन बहन भाई का तिलक कर उसके दीर्घायु की प्रार्थना करती है। भाई भी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है। बहन देवता की तरह अपने प्यारे भाई की आरती उतरती है।

 

 


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कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई-बहन के स्नेह का पर्व भाई-दूज मनाया जाता है, जो दीपावली के दो दिन बाद आता है। इस बार आज ही है ये खास दिन। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। पंडितों की मानें तो ये पर्व मनाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजे से 03 बजकर 30 मिनट तक का है।

 

भाई दूज मनाने के पीछे की कहानी

 

ऐसा माना जाता है भाई दूज के दिन सूर्य पुत्र यम ने अपनी बहन यमुना के घर जाकर भोजन करने के साथ-साथ उपहार भेंट किया था। इसलिए इस पर्व को यम द्वितीया एवं भाई दूज कहा जाता है। इस दिन यम और यमुना की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसा कहा जाता है काम में व्यस्त रहने के कारण यमराज अपनी बहन यमुना से नहीं मिल पाते थे। ऐसे में यमुना ने भाई को आने का सन्देश भेजा। यमराज ने तब सारा काम छोड़कर अपनी बहन यमुना का आतिथ्य स्वीकार किया। आज की भागदौड़ और व्यस्तता के दौर में ये पर्व हमें भाई-बहनों से मिलकर आपसी सम्बन्ध को मजबूत करना सिखाता है।



 

 

इस दिन यमुना स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता। पुराण के अनुसार यमराज ने यमुना को वरदान दिया जो भी व्यक्ति यमद्वितीया के दिन यमुना के जल में स्नान करके बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन करेगा उसकी आयु लंबी होगी।

 

भाई दूज मनाने की विधि

 

पहले बहनें चावल के आटे से चौक बनाती हैं और इस पर भाई को बिठाकर भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाती हैं। इसमें सिंदूर, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर बहन भाई की लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती हैं। इसके बाद भाई की आरती उतार कलावा बांधकर मुंह मीठा कराती है। बहन भाई को इस दिन खाना खिलाती है और भाई उपहार देते हैं। शाम के वक्त बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीपक जलाकर घर के बाहर दीप जलाती हैं। दीप का मुंह दक्षिण दिशा में होना अनिवार्य होता है।

बंगाल, बिहार सहित उत्तर भारत में इसे प्रमुखता से मनाया जाता है।


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