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पाकिस्तान में है भगत सिंह का पुश्तैनी मकान, जानिए इस क्रांतिकारी से जुड़ी कुछ रोचक बातें

Published on 28 September, 2018 at 3:25 pm By

युवाओं में आज़ादी का जोश भरने वाले क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्म आज के ही दिन 1907 में पाकिस्तान में हुआ था। सिर्फ 23 साल की उम्र में देश की आज़ादी के लिए कुर्बान हो जाने वाले भगत सिंह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।


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भगत सिंह एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्हें चाहने वाले जितने सरहद के इस पार मौजूद हैं, तो उतने ही सरहद की दूसरी तरफ भी। पाकिस्तान में उनका वो घर भी मौजूद है, जहां उनका जन्म हुआ था और जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया था।

 

 

भगत सिंह का जन्म पाकिस्तान के जिस ज़िले में हुआ था आज वो फैसलाबाद के नाम से जाना जाता है। इसी जिले के बंगा गांव में उनका जन्म हुआ था। भगत सिंह के दादा का बनाया हुआ यह घर सरकार की तरफ से चार साल पहले हेरिटेज साइट घोषित कर दिया गया था।

 

फरवरी 2014 में फैसलाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर ऑफिसर नुरूल अमीन मेंगल ने इसे संरक्षित घोषित करते हुए मरम्मत के 5 करोड़ रुपए की रकम भी दी थी।

शहीद भगत सिंह का पुश्तैनी मकान

 


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इसे सरंक्षित करने के बाद दो साल पहले इसे आम जनता के लिए खोला गया। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन नाम का एक संगठन भगत सिंह की यादों को पाकिस्तान में संजोने का काम कई सालों से करता आ रहा है।

 

इस संगठन के लोग गांव में 23 मार्च को उनके शहादत दिवस सरदार भगत सिंह मेले की भी आयोजन करते हैं है। कहते हैं उनके दादा ने एक पेड़ लगाया था जो करीब 120 साल पुराना आम का पेड़ है, वो आज भी वहां मैजूद है। उनके गांव का नाम बदल कर भगतपुरा रख दिया गया है।



 

 

भगत सिंह के पिता और चाचा दोनों ही क्रांतिकारी थे, इसलिए उनके अंदर क्रांति का गुण बचपन से ही आ गया। भगत सिंह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए। इसमें चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारी भी शामिल थे।

स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कई देशों में हुई क्रांतियों का अध्‍ययन किया। 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्‍याकांड ने भगत सिंह को हिलाकर रख दिया। इसके बाद से ही वो भारत को अंग्रेज़ों से आज़ाद कराने का सपना देखने लगे।

 

 

भगत सिंह ने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्‍थापना की। आज़ादी की लड़ाई के लिए खुद को समपर्ति कर चुके भगत सिंह की जब परिवार वालों ने शादी करानी चाही, तो वह घर छोड़कर कानपुर भाग गए थे और एक पत्र लिख गए थे उन्‍होंने अपना जीवन देश को आजाद कराने के महान काम के लिए समर्पित कर दिया है।

 

 


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जलियावाला भाग हत्याकांड के बाद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने 1928 में लाहौर में एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई। भगत सिंह को सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के जिस मामले में भगत सिंह को फांसी की सजा हुई थी। देश की आजादी के लिए लड़ते हुए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

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