भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में डॉ. होमी जहांगीर भाभा की थी अहम भूमिका

Updated on 30 Oct, 2017 at 12:13 pm

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महान परमाणु वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा को भारत में परमाणु कार्यक्रमों का जनक कहते हैं। डॉ. भाभा ही वह सर्वप्रथम व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रमों की नीवं रखी थी और उनकी वजह से भारत विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा हो सका है।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा का जन्म मुंबई में एक समृद्ध पारसी परिवार में हुआ था।

डॉ. भाभा ने उद्योगपति जेआरडी टाटा की मदद से मुंबई में ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च’ की स्थापना की थी। बाद में वह वर्ष 1945 में इसके निदेशक बने। डॉ. भाभा ने देश के आजाद होने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे वैज्ञानिकों से स्वदेश लौटने की अपील की, ताकि विज्ञान के क्षेत्र में देश का सर्वांगीण विकास हो सके।

डॉ. भाभा ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वर्ष 1948 में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की थी।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने हमेशा ही शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर बल दिया। उनका कहना था कि यह व्यावहारिक है। 1960 के दशक में जब विकसित देश विकासशील देशों को अन्य पहलुओं पर ध्यान देने के लिए कहते थे, उस समय डॉ. भाभा का तर्क था कि परमाणु ऊर्जा विकास में खासी मददगार साबित हो सकती है।

उनका मानना था कि ऊर्जा, कृषि और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों के लिए शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम शुरू होने चाहिए।

अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों में परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है।


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डॉ. भाभा का नाम पांच बार भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया, लेकिन यह सम्मान उन्हें नहीं मिल सका था। भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में डॉ. भाभा का जो योगदान रहा है, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि नोबेल पुरस्कार पाना उनके लिए एक छोटी घटना होती।

भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण के सम्मान से नवाजा।

डॉ. भाभा बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उनकी शास्त्रीय, संगीत, नृत्य और चित्रकला में गहरी रुचि थी। वह इन कलाओं के पारखी और जानकार थे। यही वजह है कि नोबेल पुरस्कार विजेता सर सीवी रमन भारत का लियोनार्दो द विंची बुलाते थे।

डॉ. भाभा की मृत्यु 24 जनवरी 1966 को एक विमान दुर्घटना में हुई थी। भारत सरकार ने इस महान वैज्ञानिक के योगदान को देखते हुए भारतीय परमाणु रिसर्च सेंटर का नाम भाभा परमाणु रिसर्च संस्थान रखा।

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