शर्मनाक! स्कूल में सरस्वती पूजा करने की मांग कर रहे छात्रों को पुलिस ने पीटा

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9:24 pm 31 Jan, 2017

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ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में शासन-व्यवस्था की स्थिति में लगातार अवनति हुई है। यहां हिन्दुओं की हालत सोचनीय है। इसी क्रम में स्कूल में सरस्वती पूजा किए जाने की शांतिपूर्ण मांग कर रहे स्कूली छात्रों को मंगलवार को पुलिस ने बर्बरता से पीटा। लाठी चार्ज की इस घटना में हावड़ा जिले में स्थित उलबेड़िया के तेहट्टा हाई स्कूल के दर्जनों बच्चे बुरी तरह घायल हुए हैं।

पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा की एक लंबी परंपरा रही है। इस अवसर पर छात्र और उनके शिक्षक स्कूलों में, अपने घरों में और मोहल्लों में सरस्वती पूजा का आयोजन करते रहे हैं। सरस्वती पूजा के दिन सार्वजनिक अवकाश होता है, इसके बावजूद बच्चे नए कपड़ों में स्कूल आते हैं और विद्या की देवी की पूजा अर्चना में शामिल होते हैं।

हालांकि, अब पश्चिम बंगाल में जो हालात हैं, उसमें सरस्वती पूजा पर संकट मंडरा रहा है। इसके लिए ममता बनर्जी सरकार की तुष्टीकरण की नीति जिम्मेदार है। बंगाल में बच्चों पर लाठीचार्ज की यह घटना इस बात का प्रतीक है कि राज्य सरकार इस्लामिक कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।

राज्य सरकार ने दो दिन पहले ही तेहट्टा हाईस्कूल को बंद कर दिया था और यहां शैक्षणिक क्रिया-कलाप पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने छात्रों के समूह को स्कूल प्रशासन ने स्कूल में नबी दिवस (पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन) मनाने की इजाजत नहीं दी थी। दरअसल, स्कूल प्रशासन का कहना है कि बाहरी इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव में कुछ छात्र बिना इजाजत के स्कूल परिसर में 13 दिसंबर को नबी दिवस का आयोजन करना चाहते थे। स्कूल प्रशासन द्वारा मना किए जाने के बाद कट्टरपंथियों ने स्कूल भवन पर हमला कर दिया और इसे नुकसान पहुंचाया। यहां तनाव बढ़ता देख, राज्य सरकार ने मामले को सुलझाने की बजाय दो दिन पहले स्कूल बंद करने का निर्णय लिया। इसके विरोध में स्कूली बच्चे आज जब राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, उस वक्त पश्चिम बंगाल पुलिस उन पर टूट पड़ी और जमकर लाठीचार्ज किया। छात्रों का कहना है कि स्कूल में पिछले 65 सालों से प्रतिवर्ष सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। वे इस साल भी इसका आयोजन करने की जिद कर रहे थे।

इन्टरनेट पर वायरल हो रहे फोटो और विडियो में देखा जा सकता है कि बेकसूर बच्चे किस तरह सरकार के जुल्म का शिकार हुए हैं।


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हालांकि, पश्चिम बंगाल में मुख्यधारा की मीडिया में रहस्यमय चु्प्पी है। इसकी कोई खबर किसी टीवी चैनल या अखबार में नहीं चल रही है।

इन्डियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नबी दिवस पर हुए विवाद की घटना के बाद मामला ठंडा पड़ गया था, लेकिन जब पिछले 27 जनवरी को छात्रों ने सरस्वती पूजा के आयोजन के लिए तैयारियां शुरू की तो इस्लामिक कट्टरपंथियों को यह नागवार गुजरा। स्कूल पर हमला कर दिया गया। इसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यहां धारा 144 लागू कर दी है और स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उत्पल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद ही स्कूल और छात्रों को सुरक्षा मुहैया कराने के स्थान पर ममता बनर्जी सरकार ने स्कूल को बंद कर दिया।

यहां उल्लेखनीय है कि नबी दिवस विवाद के कुछ ही दिन बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों के एक समूह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुलेआम धमकी दी थी। मीडिया ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। इस्लामिक कट्टरपंथियों पर कार्रवाई करने के बदले ममता बनर्जी की सरकार मासूम बच्चों पर कहर ढा रही है।

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में एक के बाद एक कई दंगे हुए हैं, जिनमें पीडि़त हिन्दू समुदाय ही रहा है। हाल ही में धुलागढ़ मे हुए दंगों को स्थानीय मीडिया ने जगह नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया की वजह से यह राष्ट्रीय खबर बन सकी थी।

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