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नेताजी सुभाष चंद्र बोस कहे जाने वाले गुमनामी बाबा का सामान होगा सार्वजनिक

Updated on 11 July, 2016 at 3:46 pm By

फैजाबाद के गुमनामी बाबा एक बार फिर चर्चा में हैं। लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस गुमनामी बाबा बन कर रह रहे थे।

शुक्रवार को 10 सदस्यीय एक कमेटी ने उनका पिटारा खुलवाया, जो उनकी मौत के बाद यहां की ट्रेजरी में रखा गया था। इस पिटारे से एक गोल फ्रेम का चश्मा और एक रोलेक्स घड़ी मिली है। यही नहीं, इससे आजाद हिन्द फौज की यूनिफॉर्म भी मिली है। गौरतलब है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इसी तरह का चश्मा पहना करते थे और घड़ी अपनी जेब में रखते थे।


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फैजाबाद के जिलाधीश योगेश्वर राम मिश्रा के मुताबिक, इस पिटारे में कुल 176 सामान रखे हुए हैं। इस पिटारे में ऐसी चिट्ठियां भी हैं, जो नेताजी के परिजनों से लिखे थे। कुछ अखबारों की कटिंग्स मिली हैं, जिनमें नेताजी से संबंधित समाचार थे।

गुमनामी बाबा के सामानों में सुभाष चंद्र बोस के मां-पिता और परिवार की तस्वीरें मिलीं हैं। कोलकाता में हर साल 23 जनवरी को मनाए जाने वाले नेताजी जन्मोत्सव की तस्वीरें भी हैं। जर्मन, जापानी और अंग्रेजी लिटरेचर की ढेरों किताबें भी सामान में शामिल हैं।

गुमानामी बाबा का सामान किया जाएगा सार्वजनिक

गुमनामी बाबा के इन सामानों को सार्वजनिक किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस संबंध में नेताजी की भतीजी ललिता बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मंच ने दो अलग-अलग रिट दायर की थी।

31 जनवरी, 2013 को हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार को आदेश दिया था कि गुमनामी बाबा के सामानों को म्यूजियम में रखा जाए, ताकि आम लोग उन्हें देख सकें।



गौरतलब है कि हाल ही में केन्द्र सरकार ने नेताजी की फाइलें सार्वजनिक की हैं। इसके बाद, नेताजी के परिजनों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी और उनसे गुमनामी बाबा के सामानों को सार्वजनिक करने की गुजारिश की थी।

आखिर कौन थे गुमनामी बाबा?

फैजाबाद में रहने वाले योगी गुमनामी बाबा को लोग सुभाष चन्द्र बोस मानते हैं। मुखर्जी कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फैजाबाद के भगवनजी या गुमनामी बाबा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस में काफी समानताएं थीं।

1945 से पहले नेताजी से मिल चुके लोगों ने गुमनामी बाबा से मिलने के बाद माना था कि वही नेताजी थे। दोनों का चेहरा काफी मिलता-जुलता था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 जनवरी (नेताजी का जन्मदिन) और दुर्गा-पूजा के दिन कुछ फ्रीडम फाइटर, आजाद हिंद फौज के कुछ सदस्य और नेता गुमनामी बाबा से मिलने आते थे।


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साभारः Bhaskar

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