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क्या आप जानते हैं दिल्ली सहित भारत के 22 राज्यों में भीख मांगना है दंडनीय अपराध?

Published on 16 August, 2017 at 5:17 pm By

अक्सर आपने बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों को सड़कों पर, ट्रैफिक लाइट के आसपास, धार्मिक स्थलों के बाहर, बाजारों में, पर्यटन स्थलों के निकट भीख मांगते हुए देखा होगा। भारत में आप कहीं भी चले जाएं आपको भिखारी हर जगह मिल ही जाएंगे। ये हमारे देश का ऐसा कडवा सच है, जिसकी हम अनदेखी नहीं कर सकते। हाल के सालों में भारत की आर्थिक विकास दर तेजी से बढ़ी है, लेकिन भिखारियों का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा है।

एक अनुमान के मुताबिक, भारत में लगभग 5,00,000 लोग अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भीख पर निर्भर हैं। इन सब में हैरानी की बात है कि ज्यादातर शहरों में भीख संगठित रूप से मांगी जाती है। इलाके बंटे होते हैं, कोई दूसरा उस क्षेत्र में भीख नहीं मांग सकता। हर भिखारी के ऊपर उसका सरगना होता है, जो कि भीख में मिले पैसे में से एक हिस्सा लेता है।


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भीख मांगना एक तरह का पेशा बन गया है। पेशेवर भिखारी पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसमें चाहे उन्हें अपने आपको या किसी और को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की ही जरूरत क्यों न पड़े।

भारतीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल लगभग 40,000 बच्चों का अपहरण होता है। उनमें से अधिकतर को भीख मांगने के पेशे में जबरन धकेल दिया जाता है। यहां तक कि देश भर में 300,000 बच्चों के साथ मारपीट, उन्हें नशा देकर, उनसे हर दिन भीख मंगवाई जाती है। हर साल हजारों गायब बच्चे इस धंधे में झोंक दिए जाते हैं। इन बच्चों का जीवन ऐसी अंधेरी सुरंग में कैद होकर रह जाता है, जिसका कोई दूसरा छोर नहीं होता। यह स्थिति बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाली है।



हम में से बहुत लोग नहीं जानते कि बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग ऐक्ट 1959 के तहत 22 राज्यों (केंद्र शासित प्रदेशों सहित) में भीख मांगना अपराध की श्रेणी में आता है। जबकि कुछ राज्यों में भीख की समस्या से झूझने के लिए कानून भी बनाए हुए हैं। लेकिन ये सारे कानून ठंडे बस्ते में हैं और सख्ती से अमल में नहीं लाए गए।

आपको शायद जानकर हैरानी होगी लेकिन ये सच है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिल्ली यातायात पुलिस के नियम के मुताबिक, ट्रैफिक लाइट पर अगर कोई शख्स भिखारियों को पैसे देता हुआ पाया जाता है तो उस पर हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

एक अधिकृत पुलिस अधिकारी बिना किसी वारंट के भीख मांग रहे शख्स को गिरफ्तार कर सकता है और उसे कोर्ट भेज सकता है। पांच साल से कम उम्र के भीख मांगने वाले बच्चों को जुवेनाइल जस्टिस ट्रिब्यूनल भेजे जाने का कानून है। भिखारी विरोधी कानूनों का उद्देश्य भीख के धंधे से लोगों को बाहर निकालकर उन्हें किसी अन्य कानूनी पेशे में प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान करना है।


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यहां हमने जिन आंकड़ों का जिक्र किया वह सचेत करने वाले है। उधर इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि पुलिस इस समस्या से निपटने में असमर्थ रही है। सरकार ने देश में भीख विरोधी नियम और कानून तो बनाए हुए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता है, जिसका परिणाम है कि देश में भीख मांगना सबसे बड़ा उद्योग बनता जा रहा है।

जो लोग भिखारियों को पैसे देते हैं असल में वह उनकी मदद नहीं, बल्कि सीधे तौर पर उनकी इस गतिविधि का समर्थन कर रहे हैं, जो कि अवैध और साथ ही अनुचित भी है। ये भीख मांगने वाले समूहों को बड़े पैमान पर भीख मांगने के लिए बढ़ावा देने जैसा है।

जहां कई भिखारियों को भीख मांगना एक धंधा लगता है। वहीं, कईयों के लिए ये मजबूरी भी है। भिक्षावृत्ति को सरकार ने अपराध की श्रेणी में लाकर तो खड़ा कर दिया, लेकिन जो मजबूरी में हाथ में कटोरा लिए खड़े हैं उनके मर्म की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

कुछ ऐसे कदम हैं जो अगर दृढ़ता के साथ उठाए जाए तो इस गतिविधि के स्तर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है कि सरकार को अपने कानूनों को अधिक कठोर बनाए। साथ ही उसके अमल में लाए जाने का ध्यान रखना भी आवश्यक है। भीख मांगने वाले उम्रदराज और अक्षम लोगों के लिए पेंशन जैसी सुविधा, सक्षम को रोजगार के अवसर और बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था देश की इस विकट समस्या को बड़े पैमाने पर हल कर सकती है। इसके अलावा, इस मामले में कार्य कर रहे एनजीओ को भी और अधिक सक्रिय होने की जरूरत है।

साथ ही जो लोग इन भिखारियों को पैसे देते हैं उन्हें इसके आगे चलकर होने वाले दूषित परिणामों के बारे में सोचने की जरूरत है। जो पैसे हम इन भिखारियों को देते हैं वो उन्हें अधिक भीख मांगने के लिए प्रेरित करता है। एक ऐसी आदत, जिसमें वे कोई काम करना ही नहीं चाहते।


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हमें यह याद रखना चाहिए कि पैसे देकर हम उनकी तरफ मदद का हाथ नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों के जीवन को बर्बाद कर रहे हैं, जिन्हें भीख मांगने वाले गीरोह जबरन इस धंधे में धकेल देते हैं। अब वक्त है बदलने का। भिखारियों को पैसे देकर उनके कार्य को बढ़ावा न दे।

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