‘कश्मीर की कली’ बन दर्शकों के दिलों पर छा गई थी सायरा बानो

Updated on 23 Aug, 2017 at 11:59 am

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बॉलीवुड की इस हसीन अभिनेत्री ने अपनी खूबसूरती और दिलकश अदाओं की बदौलत साठ और सत्तर के दशक में दर्शकों को दीवाना बना दिया था। सायरा बानो न सिर्फ गज़ब की खूबसूरत थी, बल्कि बेहतरीन अदाकारा भी थीं। हो भी क्यों न एक्टिंग का हुनर तो उनकी रगों में ही था।

विरासत में मिला एक्टिंग का गुण

23 अगस्त 1944 को जन्मीं सायारा बानो की मां नसीम बानो तीस और चालीस के दशक की नामचीन अभिनेत्री थी और उन्हें ब्यूटी क्वीन कहा जाता था। सायरा बानो का बचपन लंदन में बीता। पढ़ाई पूरी करने के बाद वो 1960 में मुंबई लौटी और मायानगरी में आने के बाद सायरा ने मां के नक्शेकदम पर चलते हुए बॉलीवुड में कदम रखा। वर्ष 1961 में आई फिल्म जंगली से सायरा ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म में कश्मीर की लड़की के रोल में सायरा ने सबका दिल जीत लिया। यह फिल्म जबरदस्त हिट रही।


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अपने से बड़ी उम्र के अभिनेता से कर ली शादी

1966 में सायरा बानो ने अपनी उम्र से काफी बड़े अभिनेता दिलीप कुमार के साथ शादी कर ली। दिलीप कुमार से शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम करना जारी रखा। वर्ष 1967 उनके करियर के लिए बेहत अहम रहा। इसी साल उन्हें राजकपूर के साथ फिल्म दीवाना में काम करने का अवसर मिला। वहीं, उनकी फिल्म शागिर्द टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई।

फिल्मी सफर



इसके बाद 1968 में आई फिल्म पड़ोसन भी सुपरहिट रही। लगातार हिट फिल्मों ने सायरा बानो को बड़ी स्टार बना दिया। पड़ोसन फिल्म में सायरा बानो पर फिल्माया यह गीत ‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है’, लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ था।

वर्ष 1970 में सायरा बानो को मनोज कुमार के फिल्म पूरब और पश्चिम में काम करने का अवसर मिला। यह फिल्म भी सुपरहिट रही। इसी साल आई फिल्म गोपी में सायरा को पहली बार अभिनेता दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला। इसके बाद दिलीप और सायरा की जोड़ी ने बैराग और दुनिया जैसी फिल्मों में एक साथ काम किया।

वर्ष 1975 में सायरा बानो ने ऋषिकेष मुखर्जी की फिल्म चैताली में चैताली की टाइटिल भूमिका निभाई। हालांकि यह फिल्म फ्लॉप रही थी, लेकिन समीक्षकों ने इसे सायरा बानो के सिने करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक माना।

करियर से संन्यास

वर्ष 1976 में आई फिल्म हेराफेरी सायरा बानो के सिने करियर की अंतिम हिट फिल्म साबित हुयी। वर्ष 1988 में आई फिल्म फैसला के बाद सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया।

सायरा बानो ने अपने तीन दशक लंबे करियर में लगभग 50 फिल्मों में अभिनय किया। आज भी उन्हें हिंदी सिनेमा की एक हसीन और चुलबुली अभिनेत्री के रूप में याद किया जाता है।


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