आखिर BCCI को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की जल्दबाजी क्यों रहती है ?

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Updated on 29 Mar, 2017 at 5:13 pm

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पाकिस्तान लंबे समय से भारत के खिलाफ एक अघोषित युद्ध लड़ रहा है। पाकिस्तान के हुक्मरान इस्लामिक आतंकवाद को विदेश नीति के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पठानकोट, उड़ी की घटना को छोड़ दीजिए, तो भी जम्मू-कश्मीर में शायद ही कोई दिन ऐसा बीत रहा हो जब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों के घुसपैठ की खबर सुर्खियां न बनती हों। इन घटनाओं में न केवल आतंकवादी मारे जाते हैं, बल्कि सेना के हमारे जवान भी अपनी जान गंवाते हैं। भारत सरकार कहती रही है कि बातचीत और आतंकवादी कार्रवाई दोनों एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को अगर संबंध बहाली करनी है तो आतंकवाद का अपना रवैया छोड़ना होगा, जो शायद नामुमकिन सी बात है।

हालांकि, इन सब मामलों से भारत में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है। उसे पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की ‘जल्दी’ है। बीसीसीआई के नीति-निर्माता चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जल्द ही द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध बहाल किए जाएं।

बीसीसीआई ने इस बारे में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इजाजत मांगी है।


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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई ने पाकिस्तान के खिलाफ एक लंबी सीरीज का प्रस्ताव रखा है. इस सीरीज में तीन टेस्ट, 5 वनडे और 2 टी-20 मैच खेले जा सकते हैं। यह सीरीज दुबई में खेले जाने की योजना बन रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में हालांकि, यह भी कहा गया है कि बीसीसीआई ने इन खबरों का खंडन किया है।

वहीं, दूसरी तरफ PCB चेयरमैन ने इस संभावित क्रिकेट सीरीज पर कहा है कि भारत सरकार राजी हो, तो इस संबंध में पाकिस्तान सरकार से बात की जाएगी।

गौरतलब है कि अंतिम बार दोनों देशों ने वर्ष 2012 में द्विपक्षीय सीरीज में हिस्सा लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच कोई सीरीज तो नहीं हुई है, लेकिन दोनों टीम चैंपियंस ट्रॉफी और विश्वकप के दौरान एक दूसरे के खिलाफ खेले थे।

सबसे बड़ा सवाल अनुत्तरित है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच अघोषित युद्ध चल रहा है तब बीसीसीआई को दुश्मन देश के साथ क्रिकेट खेलने की जल्दबाजी क्यों है ? आपको पता है क्या ?

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