काजीरंगा पर BBC ने बनाई भ्रामक डॉक्यूमेंट्री, अब सरकार ने की इसके रिपोर्टर को ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश

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Updated on 21 Feb, 2017 at 7:01 pm

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काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर बनाए गए एक डॉक्यूमेन्ट्री की वजह से संवाद संस्था BBC घिर गई है। किलिंग पर कन्जरवेशन नामक इस डॉक्युमेन्ट्री में दावा किया गया है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में अवैध शिकार के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है। इस डॉक्युमेन्ट्री में दावा किया गया है कि वन रक्षकों को शूट एंड किल का अधिकार दिया गया है। इस डॉक्युमेन्ट्री में कहा गया है कि जितने शिकारियों को गैंडों ने नहीं मारा, उससे कहीं अधिक लोग मारे गए हैं।

डॉक्युमेन्ट्री के मुताबिक, पिछले साल 17 गैंडे मारे गए थे। वहीं 23 लोगों की जान भी गई थी। इसमें दावा किया गया है कि अब तक करीब 50 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस डॉक्युमेन्ट्री को BBC के दक्षिण एशिया रिपोर्टर जस्टिन रॉलेट ने बनाया है।

रॉलेट ने दावा किया है कि 2014 से अब तक सिर्फ 2 घुसपैठियों पर मुकदमा चलाया गया, जबकि 50 लोगों को गोली मार दी गई।

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डॉक्युमेन्ट्री में की गई इस रिपोर्टिंग को ‘निहायत गलत’ बताते हुए भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने इसके रिपोर्टर को ब्लैक लिस्ट करने का सुझाव दिया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेटिव अथॉरिटी (एनटीसीए) ने एक अधिकारिक ज्ञापन-पत्र देकर बीबीसी के दक्षिण एशिया ब्यूरो को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अथॉरिटी का दावा है कि इस रिपोर्ट से शिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

काजीरंगा टाईगर रिजर्व के निर्देशक सत्येंद्र सिंह के हवाले से इन्डियन एक्सप्रेस ने लिखा हैः

“कोई शूट ऑन साइट की नीति नहीं, यह केवल कानूनी बचाव है उन वन रक्षकों के लिए जो बेहद कठिन काम करते हैं। उन्होंने (BBC) ने तथ्यों तो तोड़ मरोड़ कर पेश किया है।”



सत्येन्द्र सिंह का दावा है कि उन्होंने BBC संवाददाता के साथ करीब डेढ़ घंटे बात की थी, लेकिन इसमें सिर्फ 1 मिनट की बातचीत का ही जिक्र है। सिंह को आशंका है कि उनका कोई अलग एजेन्डा हो सकता है। अपने दावों को पुष्ट करते हुए वह कहते हैं कि हो सकता है कि यह कुछ विदेशी गैरसरकारी संगठनों और स्थानीय लोगों की शह पर किया जा रहा हो, जो मूलतः संरक्षण विरोधी हैं।

BBC की इस रिपोर्ट की आलोचना हो रही है।

इस रिपोर्ट में एशियन राइनो फाउंडेशन के विबोध तालुकदार के हवाले से बताया गया हैः

“ऊंचे दामों के कारण गैंडे के सींग अवैध वन्यजीव बाजार में बिकते हैं. सभी तरह के समाज-विरोधी तत्व आसानी से पैसा कमाने के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीबीसी ने सही तस्वीर पेश नहीं की है और इस खबर से शिकारियों को निश्चित रूप से प्रोत्साहन मिलेगा। वन विभाग का मनोबल भी कमजोर पड़ेगा, जिसने काजीरंगा के वन्यजीव संरक्षण को सफल बनाने में काफी मेहनत की है।”

वहीं, दूसरी तरफ वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के भास्कर चौधरी ने डॉक्यूमेन्ट्री और रिपोर्ट को हास्यास्पद करार दिया है। उनका दावा है कि काजीरंगा में सुरक्षा भारत के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों की तुलना में अधिक है। यही वजह है कि यहां गैंडों का संरक्षण सफल हो सका।


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