अब यहां डॉक्युमेन्ट्री, रिपोर्टिंग नहीं कर सकेंगे बीबीसी के पत्रकार; 5 साल के लिए प्रतिबंध

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Updated on 1 Mar, 2017 at 1:03 pm

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काजीरंगा पर डॉक्युमेन्ट्री बनाने के लिए मीडिया समूह बीबीसी लगातार विवादों में है। अब इसे बड़ा झटका देते हुए नेशनल टाइगर कंजर्वेटिव अथॉरिटी (एनटीसीए) ने बीबीसी तथा इसके पत्रकार जस्टिन रॉलेट पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इस तरह अब बीबीसी या उसके पत्रकार भारत के किसी टाइगर रिजर्व में न तो डॉक्युमेन्ट्री बना सकेंगे और न ही रिपोर्टिंग कर सकेंगे।

किलिंग फॉर कन्जरवेशन नामक इस डॉक्युमेन्ट्री में दावा किया गया है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में अवैध शिकार के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है। इस डॉक्युमेन्ट्री के मुताबिक वन रक्षकों को शूट एंड किल का अधिकार दिया गया है। इस डॉक्युमेन्ट्री में कहा गया है कि जितने शिकारियों को गैंडों ने नहीं मारा, उससे कहीं अधिक लोग मारे गए हैं।

बीबीसी दक्षिण एशिया के पत्रकार जस्टिन रॉलेट ने डॉक्युमेन्ट्री में दावा किया है कि पिछले साल यहां 17 गैंडे मारे गए थे। वहीं, 23 लोगों की जान भी गई थी। इसमें दावा किया गया है कि अब तक करीब 50 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

काजीरंगा के अधिकारी इस बात को गलत बताते हैं।


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काजीरंगा अभयारण्य के एक अधिकारी का कहना है कि देखते ही गोली मारने का आदेश नहीं हैं। अधिकारी के मुताबिक बीबीसी ने तथ्यों को तोर मरोड़कर नाटकीय ढंग से पेश किया।

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने डॉक्युमेन्ट्री को निहायत गलत व भ्रामक करार देते हुए इसके रिपोर्टर को ब्लैक-लिस्ट करने का सुझाव दिया था। वहीं, नेशनल टाइगर कंजर्वेटिव अथॉरिटी (एनटीसीए) ने एक अधिकारिक ज्ञापन-पत्र देकर बीबीसी के दक्षिण एशिया ब्यूरो को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इस नोटिस में कहा गया था कि बीबीसी ने मंत्रालय को दिखाए बिना ही डॉक्युमेन्ट्री का प्रसारण कर लिया।

अथॉरिटी का दावा है कि इस रिपोर्ट से शिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा, इसलिए मीडिया समूह को प्रतिबंधित कर दिया जाए।

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