इस भारतीय महिला ने 350 किलोमीटर तक नंगे पांव लगाई दौड़, जानिए क्या था मकसद

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5:54 pm 29 Nov, 2016

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भारत में एक बड़ी आबादी उन महिलाओं की है जो अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत नहीं रहती। अपने घर-परिवार को संभालने में वह खुद का ख्याल रखना, खुद को समय देना भूल जाती हैं।

ऐसे में हैदराबाद की रहने वाली पर्वतारोही नेल्लिमा पुडोता ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और ब्रैस्ट कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से हाल ही में विजयवाड़ा से नंगे पैर दौड़ लगाते हुए विशाखापत्तनम तक का सफर तय किया है।

नेल्लिमा ने अपने इस जागरूकता अभियान के तहत आठ दिनों में 350 किलोमीटर का सफर तय किया।

पूर्व कॉर्पोरेट कर्मचारी रही 30 वर्षीय नेल्लिमा, एक लोकप्रिय पर्वतारोही के रूप में जानी जाती हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत के शिखर पर अपना कदम लगभग रख ही दिया था। इस साल के अप्रैल में, नेल्लिमा माउंट एवेरेस्ट के शिखर तक पहुंचने से सिर्फ 200 मीटर दूर थी, तभी उनका स्वास्थ्य ख़राब हो गया। अपनी बिगड़ती सेहत की वजह से उन्हें पीछे हटना पड़ा।

हमेशा कुछ अलग करने की सोच रखने वाली नेल्लिमा ने अपने इस अभियान के लिए पांच महीनों तक कड़ा अभ्यास किया।

 

 


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एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत करते हुए नेल्लिमा ने कहा:

“मैंने नंगे पैर ही दौड़ना पसंद किया, क्योंकि मेरा मानना है कि इंसान नेचुरल रनर है। लेकिन जब मैंने विजयवाड़ा से विजाग के बीच अपनी इस यात्रा को तय करने का फैसला किया तो मिलिंद सोमन ने मुझे बेयरफुट सैंडल का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने मुझसे कहा कि इनका इस्तेमाल करने से मुझे यात्रा को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यहां तक कि उन्होंने मुझे बेयरफुट सैंडल की एक जोड़ी उपहार में दी। सुबह मैं नंगे पैर ही अपनी यात्रा को शुरू करती थी और दोपहर में सैंडल पहन लिया करती थी ताकि तारकोल की गर्म सड़कों पर पैरों को नुकसान न पहुंचे।”

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नेल्लिमा पुडोता, बॉलीवुड मॉडल और एक्‍टर मिलिंद सोमन के साथ Facebook

नेल्लिमा ने अपनी यात्रा 12 नवम्बर को बेंज सर्किल से सुबह 5 बजे से शुरू की, जिसमें उन्होंने प्रतिदिन  50 किलोमीटर का सफर तय किया।

विशाखापत्तनम पहुंचने के बाद नेल्लिमा यहां 20 नवम्बर को आयोजित पिंकाथॉन का हिस्सा बनी। जहां उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के बारे में जागरूक करने के लिए खुद साड़ी पहनकर दौड़ में भाग लिया।

नेल्लिमा कहती है कि महिलाओं का स्वास्थ्य सर्वोपरि है, लेकिन दुर्भाग्य से इसे हमेशा से नजरअंदाज किया जाता है। अब वक़्त आ गया है कि महिलाओं को स्वास्थ्य को लेकर अधिक सचेत होना चाहिए।

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