बनलेखी: गूगल मैप की पहुंच से दूर बसा प्रकृति की गोद में एक रहस्मयी खूबसूरत गाँव

author image
Updated on 3 Oct, 2018 at 2:24 pm

Advertisement

अगर आपको पर्वत की चोटियों के स्वर्ग सरीखे सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के दर्शन करना हो तो निसंदेह देवभूमि नैनीताल की वादियों से उपयुक्त जगह हो नही सकती। घने वनों के बीच प्रकृति की गोद में, चिड़ियों के मधुर संगीत और सूर्यास्त के उत्सव में स्वर्णिम आभा से आकाश चूमते-चमकते श्रृंखलाबद्ध पर्वत किसी भी प्रकृति प्रेमी और शांति की तलाश में निकले सैलानी के मन को भा सकती है।

इन्हीं में से एक है मुक्तेश्वर, जिसे साक्षात मुक्ति के ईश्वर यानी देवों के भी महादेव शिव का निवास स्थान माना जाता है। मुक्तेश्वर नैनीताल से क़रीब 51 किमी दूर है। मुक्तेश्वर के सुदूर तक फैले रमणीक पर्वतों-हिमाच्छादित की गोद में एक बेहद ही सुंदर गांव है ‘बनलेखी’। मशीनरी युग से अछूती बनलेखी की धरती की सुंदरता देख कर लगता है मानो शिव भी यहां लेटकर अपने प्रिय स्थानों के दर्शन कर रहे हों। तभी तो गूगल मैप भी बनलेखी के पहुंच से बाहर है।

 

tripadvisor


Advertisement

सूर्यनमस्कार करता ‘बनलेखी गांव’

बनलेखी अपनी सुंदरता के कारण इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। घने वनों के बीच प्रकृति की गोद में, पर्वतों की बारिश, बादल, धूप से कभी ना ख़त्म होने वाली आंखमिचौली ‘बनलेखी’ को ख़ास बनाती है। अगर आप भी शहर के थकाऊ दिनचर्या से ऊब गए हैं तो निश्चित ही ‘बनलेखी’ में उगते हुए सूरज को देखना सुखद अनुभव होगा।

 

 

अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो बनलेखी आपको आत्मिक शक्ति के साथ उर्जा प्रदान करने वाली है। सड़क के दोनों तरफ पहाड़ियों पर घने देवदार वृक्ष आसमान छूने का प्रयत्न करते दिखेंगे, जिन पर उछलकूद करते कठफोडवे, चटख नीले रंग में नीलकंठ और भिन्न भिन्न के पक्षीयों के कलरव आपका मन हर लेंगे। पहाड़ियों पर सुदूर तक फैले सीढ़ीनुमा खेत और बर्फ से ढकी नंदा देवी और हिमालय पर्वतमाला की अन्य चोटियों का सूर्यस्नान आपको स्वर्ग की अनुभूति कराएंगी।

 

यहा भी घूमें

भालू गाढ़ वाटरफ़ॉल और गहना वाटरफॉल

आड़ू, खुमानी, पुलम व सेब के बागानों के लिए प्रसिद्ध मुक्तेश्वर को प्रकृति ने उपहार स्वरूप दो-दो वाटरफ़ॉल प्रदान किए हैं। रामगढ़ तहसील में गहना वाटरफॉल और बनलेखी से क़रीब 12 किमी दूर स्थित भालू गाढ़ वॉटरफ़ॉल पर्यटकों के लिए अलग मनभावन आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

 

मुक्तेश्वर धाम

मुक्तेश्वर धाम तक पहुंचने के लिए लगभग 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में एक तांबा योनि के साथ एक सफेद संगमरमर का शिवलिंग है। यह शिवलिंग ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान, गणेश और नंदी की मूर्तियों से घिरा हुआ है। इस स्थान पर आकर भक्तो को आत्मिक और मानसिक शान्ति प्राप्त होती है।

 

नंदा देवी चोटी के दर्शन

मुक्तेश्वर के सबसे अच्छे अनुभवों में एक है नंदा देवी चोटी के दर्शन। प्रात: सुबह जब सूर्य अपनी पहली किरण नंदा देवी पर्वत की चोटी पर सहला कर धीरे से अंधेरे की परत को सरकाती है तो नंदा देवी का मनोहर मुख प्रगट होकर हमें मंत्रमुग्ध कर देता है। ऐसा प्रतीत होता हैं मानो स्वर्ग के दर्शन हो गए।

 

बर्न फायर के साथ मधुर संगीत का आनंद ले

बनलेखी खूबसूरत पिकनिक स्पॉट में से एक है। इस हिल स्टेशन पर सबसे रोमांचक एक्टिविटी ट्रैकिंग होती है। यहां आप कैंपिंग भी कर सकते है और रात्रि में बर्न फायर के साथ मधुर संगीत का भी आनंद ले सकते हैं।  Club Taurus Adventure Camp बनलेखी में सैलानियों के लिए कैंपिंग की व्यवस्था मुहैया करती है, जिसके लिए आपको 2500 रुपये ख़र्च करने होंगे।

 

कुमाउंनी व्यंजन आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे

मुक्तेश्वर से सुदूर बसे बनलेखी में आपको उत्तराखंड की असल संस्कृति की झलक यहां के स्वाद और खुशबू में घुलती मिलेगी। शहर से अछूते इस गांव में कुमाउंनी व्यंजन आपको मंत्रमुग्ध कर जाएंगे। मड़वे की रोटी के साथ सिसुणे का साग आपका दिन बना देगा। साथ में कापा, भट की चुटकानी और मुँह में घुलते स्वादिष्ट आलू के गुटखे का कभी ना भूलने वाला स्वाद इस यात्रा को यादगार बना देगा। वैसे बनलेखी से सुदूर मुक्तेश्वर में ऑर्गनिक किचन, कैफ़े लोकल और द बर्डकेज़ जैसे कई रेस्टोरेंट हैं, जहां आप पहाड़ी खाने से लेकर हर तरह के व्यंजन का लुफ्ट उठा सकते हैं।

 

कैसे जाएं

मुक्तेश्वर पहुचने के लिए आप हवाई, सड़क और रेल मार्ग तीनो का सहारा ले सकते हैं। हवाई यात्रा से आप पंतनगर हवाई अड्डे तक का सफ़र तय कर सकते हैं। उसके बाद करीब 100 किमी का सफ़र प्राइवेट कैब या फिर स्टेट ट्रांसपोर्ट का सहारा ले कर मुक्तेश्वर पहुंच सकते हैं। अगर आप यह सफ़र रेलगाड़ी द्वारा करना चाहते हैं तो मुक्तेश्वर से करीब 72 किमी काठगोदाम निकटतम रेलवे स्टेशन है। इस रेलवे स्टेशन से मुक्तेश्वर तक पहुँचने के लिए तक 2 घंटे का सफ़र तय करना होगा। वहीं, अगर आप सड़क से नैनीताल (51 किमी) या हल्द्वानी (72 किमी) से मुक्तेश्वर पहुंच सकते हैं। नैनीताल के माध्यम से धनाचुली और भवाली के रास्ते में लुभावने दृश्यावली और दृश्यों की सुन्दरता आपके होश उड़ा सकती है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement