जानिए बांग्लादेश के इस ‘हीरो’ की क्यों हो रही है भारत में चर्चा?

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Updated on 17 Dec, 2016 at 5:15 pm

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हम पहले भी बात करते आ रहे हैं कि सोशल मीडीया प्लेटफार्म सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नही रह गया है। इसने जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को विस्तृत किया है, वहीं यह मौका भी देता है कि आप अपने हुनर को दुनिया के समक्ष रख पाए। कुछ दिन पहले ही आपने एक खबर पढ़ी होगी जिसमें अपनी ‘खूबसूरती’ के कारण एक पाकिस्तानी चाय वाले का फोटो वायरल हुआ था। सोशल मीडीया प्लेटफार्म के मनोरोगियों ने उसकी तुलना भारत के प्रधानमंत्री से कर दी थी क्योंकि पीएम मोदी भी कभी चाय बेचा करते थे। दरअसल आजकल हम उस दुनिया में जी रहे हैं जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हम किसी का भी मजाक उड़ा सकते हैं।

ऐसी ही कुछ फोटो एक बार फिर सोशल मीडीया पर वायरल हो रही है, जिसका चर्चा का विषय खूबसूरती से जुड़ा है। विज्ञापनों के इस दौर और दुनिया की ग्लैमर इंडस्ट्री ने खूबसूरती के मायने बदले, तो चेहरे भी बदले, लेकिन अगर सच कहें तो खूबसूरती अपना असल वजूद खो चुकी है।

बात कर रहे हैं बांग्लादेश के एक्टर अशर्फुल अलोम सईद की, जिन्हें उनके मुल्क में ‘हीरो अलोम’ के नाम से भी पुकारा जाता है। पर्सनालिटी के हिसाब से अगर देखें तो अलोम साधारण कद काठी, पतले शरीर और सांवले रंग के हैं।

हो सकता है बॉलीवुड और हॉलीवुड में ‘हीरो’ की जो पर्सनालिटी होती है ‘हीरो अलोम’ उससे भिन्न हो। लेकिन हमें ये नही भूलना चाहिए कि इसी ग्लैमर इंडस्ट्री ने रजनीकांत, शाहरुख ख़ान, नवाज़ुद्दीन सिद्धकी जैसे सामान्य से दिखने वाले जाने कितने ही होनहार प्रतिभावान कलाकार दिए हैं।

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बांग्लादेश का ये स्टार बीते कुछ दिनों से भारत में भी चर्चा का विषय बन गया है। भारत में चर्चा में आने की वजह उनका शरीर और रंग का भेदभाव है। सोशल मीडिया पर ज्यादातर लोग हीरो अलोम का मजाक बना रहे हैं।

बता दें कि हीरो अलोम कई म्यूज़िक वीडियो बना चुके हैं। इन वीडियो में वो खुद हीरो का रोल करते हैं। साथ में गोरे रंग की मॉडल्स भी होती हैं। सोशल मीडिया पर इन्ही वीडियो से ली तस्वीरें शेयर की जा रही हैं।

आठवीं फेल अलोम कभी चनाचूर बेचते थे वहीं अलोम अब तक 500 वीडियो कर चुके हैं। अलोम के यूट्यूब चैनल के व्यू लाखों में हैं। अलोम का लोकल केबल नेटवर्क का बिजनेस भी है पर अफसोस अलोम की काबिलियत की जहां तारीफ होनी चाहिए वहां उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।

याद रखिए वास्तविक खूबसूरती कद-काठी, रंग या कपड़ों से नहीं दिखती, असल खूबसूरती इंसान के चरित्र और कर्मों से झलकती है। साथ में हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं खत्म हो जाती है जहां से दूसरे की नाक शुरू हो जाती है।


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