अब भारत में मैला ढोने का काम इंसान नहीं, बल्कि रोबोट करेंगे!

Updated on 5 Sep, 2018 at 5:28 pm

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भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है और इस लिहाज से किसी भी सिस्टम को सुचारू रूप से चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। तकनीक के आ जाने से बेरोजगारी सर पर मंडराने लगी है तो वहीं अब रोबोट मानवीय क्रियाकलापों को चुनौती देते हुए आ धमका है। ज्यादातर काम अब मशीनों के हवाले है और मानव संसाधन के सदुपयोग का सवाल मुंह बाए खड़ा है। वहीं, मशीन के अभाव या लाचारीवश लोग छोटा से छोटा काम करने को बाध्य हैं!

 

 

सरकार की महत्वाकांक्षी प्रयास ‘स्वच्छता अभियान’ ने देश भर में व्यापक असर दिखाया है, लेकिन सफाईकर्मियों ने अपने जान को दाव पर लगाकर गंदगी की सफाई की है। ऐसा सदा से होता आया है कि लोग साफ-सफाई करते वक्त लापरवाही से रोगग्रसित होते हैं। हालांकि, भारत में मनुष्य द्वारा मैला ढोना असंवैधानिक है, लेकिन ये लागू होता दिख नहीं रहा।

 

इसका समाधान ये रोबोट लेकर आया है, जो सफाईकर्मी का काम करने में सक्षम है!

 

 


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न्यू इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन’ के अनुसार 2010 से 2017 के बीच 1470 मैला ढोने वाले लोगों ने जान गंवाई है। आज भी बेरोजगारी और मजबूरी में भारत में 1.8 लाख लोग मैला ढोने के कार्य में लगे हुए हैं। जिस गंदगी के बगल से लोग गुजरना पसंद नहीं करते, उसे सफाईकर्मी हाथ लगाकर साफ करते हैं। इस अमानवीय कार्य को बंद करने की दिशा में ये रोबोट सहायक है।

 

 

तिरुवनंथपुरम के जेनरोबोटिक्स कंपनी के इंजीनियर्स ने 80 किलोग्राम का रोबोट बनाया है जो मैनहोल के अन्दर जाकर कूड़ा-कचरा जमा करता है जिसे मॉनीटर पर देखा जा सकता है। इस रोबोट की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और ये काम करने के लिए तैयार हो चुका है।

 

 

कंपनी के 25 वर्षीय सीईओ विमल गोविंद कहते हैंः

“अब समय आ गया है कि मैनहोल को रोबोहोल में बदल दिया जाए। इसके जरिए मानव समुदाय का उपकार हो सकेगा। केरल वाटर अथॉरिटी ने तिरुपनंथपुरम में हर सीवर की सफ़ाई रोबोट बैंडीकूट से करवाने का निर्णय लिया गया है।”

 

वास्तव में इस भारतीय रोबोट से उम्मीद की किरण दिखती है!

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