दुनिया की सबसे ऊंची अखंड प्रतिमा है बाहुबली गोमतेश्वर

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Updated on 15 Dec, 2015 at 2:46 pm

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56 फुट ऊंची गोमतेश्वर प्रतिमा को एक ही पाषाण खण्ड द्वारा निर्मित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा माना जाता है। कर्नाटक के मैसूर जिले में इन्द्रगिरि नामक पहाड़ी पर स्थित इस प्रतिमा में शक्ति, साधुत्व, बल व औदार्य की भावनाओं का अद्भुत प्रदर्शन है।

गोमतेश्वर की मूर्ति मध्ययुगीन मूर्तिकला काअप्रतिम उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिस्र को छोड़कर संसार में अन्यत्र इस तरह की विशाल मूर्ति नहीं बनाई गई।

मान्यताओं के मुताबिक, वर्ष 983 में यहां के गंग शासक रचमल्ल के शासनकाल में चामुण्डराय नामक मंत्री ने बाहुबली इस विशाल प्रतिमा का निर्माण करवाया था। माना जाता है कि बाहुबली जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ के पुत्र थे।


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बड़े भाई भरत के साथ हुए घोर संघर्ष के बाद जीता हुआ राज्य उन्हीं को लौटा दिया था। बाहुबली को आज भी जैन धर्म में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान पर मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त ने भी कुछ दिन बिताए थे।



कुछ विशेष पर्वों पर बाहुबली गोमतेश्वर की इस मूर्ति का अभिषेक होता है। इसका उल्लेख पहली बार वर्ष 1398 में मिलता है। इस मूर्ति का सुन्दर वर्णन वर्ष 1180 में वोप्पदेव कवि द्वारा रचित एक कन्नड़ शिलालेख में भी मिलता है।

इस स्थान पर दो स्तम्भ भी मिले हैं, जिनसे गंग राजवंश के प्रसिद्ध राजा राजा नोलंबांतक, मारसिंह और जैन प्रचारक मम्मलीषेण के संबंध में जानकारियां प्राप्त होती हैं। इन्होंने वैष्णवों तथा जैनों के पारस्परिक विरोधों को मिटाने की चेष्टा की थी और दोनों सम्प्रदायों को समान अधिकार दिए थे।

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