ऑस्ट्रेलिया में कंगारुओं के कत्ल की सलाह क्यों दे रहे हैं विशेषज्ञ ?

Updated on 12 Sep, 2017 at 6:24 pm

कंगारुओं को ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्राप्त है। हालांकि, इनकी बढ़ती संख्या अब ऑस्ट्रेलिया के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। आलम यह है कि विशेषज्ञों ने इनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए लोगों को अधिक से अधिक कंगारुओं का मांस खाने की सलाह दी है।

वर्ष 2010 में कंगारुओं की संख्या जहां 2 करोड़ 70 लाख थी, वहीं वर्ष 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 5 करोड़ के करीब होने जा रही है, जो ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी के दोगुने से अधिक है।

कंगारुओं की तेजी से बढ़ रही संख्या की वजह बारिश के कारण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध भोजन को बताया गया है। ऑस्ट्रेलिया में कंगारुओं को मारने को लेकर सख़्त क़ानून हैं। हर प्रांत में मारे जाने वाले कंगारुओं की संख्या निर्धारित है। साथ ही यहं कंगारुओं के मांस को अधिक पसंद नहीं किया जाता, क्योंकि राष्ट्रीय पशु होने की वजह से लोग आशंकित रहते हैं। यही वजह है कि इसकी मांग कम है।


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एक निर्धारित संख्या में कंगारुओं को प्रतिवर्ष मारा जाता है, लेकिन इस पर विवाद भी होता है।

विशेषज्ञ इस बात पर भिड़ते हैं कि कंगारुओं को मारने का पर्यावरण पर असर पड़ता है या नहीं। हालांकि, कंगारुओं के मांस समर्थक भी हैं। उनका कहना है कि कंगारू के मांस में फैट कम होता है और ये अन्य जानवरों की तरह मीथेन गैस भी कम उत्सर्जित करते हैं, इसलिए इन्हें पालना पर्यावरण के लिए अधिक लाभकारी है।

न्यूज.कॉम की रिपोर्ट में एडिलेड यूनिवर्रसिटी के प्रोफेसर डेविड पैटन के हवाले से बताया गया हैः

“लोगों को पर्यावरण की रक्षा करने और मृत पशुओं को सड़ने से बचाने के लिए कंगारुओं को मारे जाने की ज़रूरत है। बड़ी तादाद में उपलब्ध होना कंगारू की गलती नहीं है, वजह शायद ये है कि हम ही उन्हें मारने के प्रति अनिच्छुक हैं। यदि उन्हें जल्द ही नहीं हटाया गया तो ये नुकसानदेह हो सकता है।”

फिलहाल कंगारुओं पर ऑस्ट्रलिया में नई बहस तो छिड़ ही गई है।


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