बांग्लादेश में हिन्दुओं के सफाए की साजिश, हफ्ते भर में चौथे पुजारी की हत्या

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Updated on 7 Jul, 2016 at 5:23 pm

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बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा सुनियोजित तरीके से हिन्दुओं के सफाए की साजिश रची जा रही है। इसी क्रम में यहां के पभना शहर के हेमायतपुर में शुक्रवार की सुबह एक हिन्दू आश्रम के पुजारी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। मृतक का नाम नित्यारंजन पांडे बताया गया है।

पिछले एक सप्ताह में किसी हिन्दू की हत्या का यह चौथा मामला है।

अब तक इस जघन्य हत्या की किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें इस्लामिक कट्टरपंथियों का हाथ हो सकता है। इससे पहले हत्या की घटनाओं की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट और अन्य आतंकवादी संगठनों ने ली थी।

तीन दिन पहले ही मुस्लिम चरमपंथियों ने हिन्दू पुजारी आनंद गोपाल गांगुली की हत्या कर दी गई थी।

पिछले जनवरी से अब तक 40 हत्याएं

बांग्लादेश में गैर-मुस्लिम व अल्पसंख्यकों में दहशत कायम करने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जनवरी से अब तक 40 से अधिक लोगों की हत्याएं की हैं। मृतकों में हिन्दुओं के अलावा कई ऐसे धर्म-निरपेक्ष ब्लॉगर भी शामिल हैं, जो इस्लामिक कट्टरपंथ और मौलवियों के खिलाफ लिखते रहे हैं।

मारे जाने वालों में शिक्षाविद्, समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता और हिन्दू धार्मिक अल्पसंख्यकों की संख्या अधिक रही है।

thegatewaypundit

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इन तमाम हत्याओं की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट नामक आतंकवादी संगठन ले रहा है। लेकिन बांग्लादेश की सरकार का कहना है कि देश में इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी नहीं है।

सरकार कहती रही है कि इन हत्याओं के पीछे विपक्ष और स्थानीय अतिवादी संगठनों का हाथ हो सकता है।



अल्पसंख्यक हिन्दुओं का सफाया

बांग्लादेश में हिन्दुओं के सफाए की बात कोई नई नहीं है। वर्ष 1047 में यहां हिन्दू आबादी करीब 28 फीसदी थी, जो 1981 में 12 फीसदी रह गई। वर्ष 2011 की जनगणना आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी अब मात्र 9 फीसदी से भी कम है।

अनुमान के मुताबिक, वर्ष 1947 के बाद से अब तक बांग्लादेश में इस्लामीकरण के नाम पर करीब 30 लाख से अधिक हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया।

इतने बड़े पैमाने पर हो रहे नरसंहार पर न तो दुनिया के किसी मानवाधिकार संगठन की नजर जाती है और न ही इस पर किसी तरह की बात होती है।


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