कानपुर कैन्ट से सपा उम्मीदवार ‘माफिया डॉन’ अतीक अहमद के खिलाफ हैं 44 अापराधिक मामले

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Updated on 20 Dec, 2016 at 12:19 pm

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माफिया डॉन से बाहुबली नेता बने अतीक अहमद को भले ही समाजवादी पार्टी ने कानपुर कैन्ट विधानसभा सीट से टिकट दे दिया है, लेकिन इससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अतीक अहमद के खिलाफ 44 मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, अपहरण और फिरौती जैसे संगीन अपराध शामिल हैं।

माना जा रहा था कि अतीक अहमद को सपा टिकट नहीं देगी, क्योंकि इससे अखिलेश यादव की छवि को नुकसान हो सकता है।

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अतीक अहमद ने वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की टिकट पर श्रावस्ती से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कानपुर कैन्ट विधानसभा सीट पर ‘गड्डी’ जाति के लोगों की संख्या अधिक है और यही वजह है कि खुद इसी जाति के अतीक अहमद के जीतने की संभावना बढ़ जाती है।

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हाल ही अतीक अहमद SHIATS इंस्टीच्यूट में हुई मारपीट के बाद चर्चा में आए थे। SHIATS इंस्टीच्यूट, इलाहबाद के जनसंपर्क अधिकारी ने आरोप लगाया था कि अतीक अहमद अपने 50-60 आदमियों के साथ वहां पहुंचे थे और उनके कर्मचारियों के साथ मारपीट की। अतीक अहमद के लोग हथियारों से लैस थे। इस मामले में अतीक अहमद और उनके 60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था.

इस बीच अतीक अहमद के ‘आर्म्स लाइसेंस’ को रद्द करने की सिफारिश जिले के एसएसपी ने डीएम से की है।

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इलाहाबाद शहर में अतीक अहमद एक ऐसे राजनेता के रूप में परिचित हैं, जिनका इतिहास आपराधिक रहा है। वह किसी जमाने में माफिया डॉन थे और अब तक उनकी यह छवि बरकरार है। अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था। मूलतः उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के रहने वाले अतीक अहमद के खिलाफ पहला मामला तब दर्ज हुआ था, जब वह सिर्फ 17 साल के थे। यह मामला हत्या का था। इसके बाद अतीक अहमद ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आपराधिक दुनिया में आगे ही बढ़ते गए।

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अतीक अहमद फूलपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे हैं। वह 1989 से 2004 के बीच पांच बार विधायक भी रहे हैं। माना जाता है कि अहमद को समाजवादी पार्टी सु्प्रीमो मुलायम सिंह यादव का वरदहस्त प्राप्त है। सपा की सरकारों के दौरान अतीक अहमद की आपराधिक गतिविधियां जारी रहीं थीं, लेकिन मायावती के शासनकाल में उन पर नकेल कसी गई। अतीक अहमद के खिलाफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कौशाम्बी, चित्रकूट और इलाहाबाद सहित कई शहरों में अापराधिक मामले दर्ज हैं। बिहार में भी उनपर कई मामले चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश चुनावों की गहमागहमी के बीच यह चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी अतीक अहमद को टिकट दे सकती है, लेकिन अखिलेश यादव कई मौकों पर इससे जुड़े सवाल टाल गए थे।


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