शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय जनता पार्टी को शून्य से शीर्ष पर पहुंचाया

Updated on 16 Aug, 2018 at 7:33 pm

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93 साल के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत गंभीर बनी हुई है। एम्स में भर्ती अटल जी की सेहत का हाल चाल जानने  के लिए नेताओं की लाइन लगी हुई है। हम आपको बता दें कि अटल जी उन चुनिंदा नेताओं में से एक है जिन्हें असल में जननेता कहा जाता है, वो लोगों के बीच कितने लोकप्रिय थे इसका अंदाज़ा उनके भाषणों में जुटने वाली भीड़ से लगया जा सकता है।

आज देश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीजेपी को फर्श से अर्श पर ले जाने का श्रेय वाजपेयी जी को ही जाता है?

 

 

जनसंघ और जनता पार्टी ही बाद में बीजेपी बनीं और इसकी नींव रखने वालों में एक नाम अटल बिहारी वाजपेयी का भी था। 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी का गठन हुआ। अपने पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को महज़ 2 सीटें मिली थी, मगर इस हार से अटल जी निराश नहीं हुए। हालांकि, उस वक़्त किसी ने यह भी नहीं सोचा होगा कि कभी बीजेपी कांग्रेस से भी आगे निकल जाएगी।

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था, ‘अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।’ और उनकी बाद बिल्कुल सच साबित हुई आज केंद्र की सत्ता से लेकर देश की 20 राज्यों में बीजेपी की सरकार है, लेकिन कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस के एकछत्र राज में बीजेपी का पनपना और शीर्ष पर जाना आसान नहीं था, इसमें बहुत बड़ा योगदान अटल जी का है।

 

 


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अटल बिहारी वाजयेपी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राजनीति में आए। 1951 में वाजपेयी ने आरएसएस की मदद से भारतीय जनसंघ पार्टी बनाई जिसमें श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेता शामिल थे। 1957 में वाजपेयी पहली बार बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर राज्‍यसभा के सदस्‍य बने। वाजपेयी का व्यक्तित्व कितना करिश्माई था इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय के वर्तमान प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि आने वाले दिनों में यह व्यक्ति जरूर प्रधानमंत्री बनेगा। 1968 में वाजपेयी राष्‍ट्रीय जनसंघ के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने।

 

 

1975-77 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी का वाजपेयी ने भी खूब विरोध किया और बाद में गिरफ्तार भी कर लिए गए। वाजपेयी के अलावा जनता पार्टी के महानायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्‍व में आपातकाल का विरोध हो रहा था। बाद में जेल से छूटने के बाद वाजयेपी ने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर लिया। 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की जीत हुई थी और मोरारजी भाई देसाई प्रधानमंत्री बनें। इस सरकार में वाजपेयी विदेश मामलों के मंत्री बने थे।

विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी पहले ऐसे नेता थे, जिन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासंघ को हिन्‍दी में भाषण दिया। हालांकि, 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई, मगर वाजपेयी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। कुछ समय बाद पार्टी में मनमुटाव की वजह से 1980 में वाजपेयी जनता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। वाजपेयी ही बीजेपी के पहले अध्यक्ष बने थे।

 

 

अटल बिहारी वाजपेयी 1996 से लेकर 2004 तक 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने। वो देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक रहे हैं। पहले दो बार में तो वाजपेयी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएं, मगर 1999 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी जितने कमाल के जननेता थे, उतने ही बेहतर कवि भी थे।

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