संतरे बेचने को मजबूर राष्ट्रीय अवार्ड विजेता तीरंदाज को मिली कोच की नौकरी

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Updated on 12 Feb, 2017 at 9:01 am

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असम के चिरांग जिले में संतरे बेचने को मजबूर राष्ट्रीय अवार्ड विजेता महिला तीरंदाज बुली बासुमातरी को अब कोच की नौकरी मिल गई है। बुली ने दो दिन पहले ही असम के खेलमंत्री नब कुमार दोले के साथ मुलाकात की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक अब बुली तीरंदाजी कोच के रूप में सरुहोजाइ में नियुक्त होंगी।

असम के चिरांग जिले की निवासी बुली उस वक्त चर्चा में आईं थीं, जब उन्हें सड़क किनारे संतरे बेचते हुए देखा गया था।

तीरंदाजी की दुनिया में बुली एक बड़ा नाम रही हैं। वह वर्ष 2004 से भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के सानिध्य में तीरंदाजी के खेल में झंडे गाड़ती रही है। महाराष्ट्र में आयोजित नेशनल जुनियर आर्चरी चैम्पियनशिप में वह दो गोल्ड मेडल और एक सिल्वर जीच चुकी है।

बुली पहली बार सुर्खियों में तब आई, जब उसने झारखंड में आयोजित 50 मीटर के इवेन्ट में नेशनल सीनियर आर्चरी चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।



इन अवार्ड्स के अलावा बुली बासुमातरी के नाम राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर कई अन्य अवार्ड्स भी हैं।

तीरंदाजी के क्षेत्र में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही बुली की जिन्दगी वर्ष 2010 में कठिन हो गई, जब चोट की वजह से उसे खेल से बाहर हो जाना पड़ा। कुछ महीने बाहर रहने के बाद जब वह फिट हुई तो आर्थिक तंगी आड़े आ गई। और वह खेल में वापसी नहीं कर सकी। बाद में उन्हें अपना जीवनयापन करने के लिए संतरे बेचना पड़ा था।

इस संबंध में मीडिया में जब रिपोर्ट छपे तो असम सरकार एक्टिव हुई और बुली की खोज खबर ली। अब बुली एक बार फिर तीरंदाजी की दुनिया में वापसी के लिए तैयार है।


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