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काकोरी कांड के इन वीर सेनानियों ने आज ही के दिन हंसते–हंसते चूमा था फांसी का फंदा

Updated on 20 December, 2018 at 12:59 am By

आज महान भारतीय क्रान्तिकारी अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ, रामप्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह की पुण्यतिथि है। काकोरी कांड में उनकी भूमिका के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वर्ष 1927 के 19 दिसम्बर को फांसी पर लटका दिया था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अशफ़ाक़, बिस्मिल और रोशन सिंह की भूमिका निर्विवाद रूप से हिन्दू-मुस्लिम एकता का अनुपम आख्यान है। ये तीनों उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के रहने वाले थे।


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अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ



अशफ़ाक़ न सिर्फ भारतीय क्रान्तिकारियों की महान परम्परा के वाहक थे, बल्कि एक बेहतरीन शायर भी थे। वह उर्दू के अलावा हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में भी कविताएं और लेख लिखा करते थे। उनका पूरा नाम अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ वारसी हसरत था। अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ ने रामप्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह के सक्रिय सहयोग से वर्ष 1925 की 9 अगस्त तो काकोरी स्टेशन पर सरकारी खजाना लूट लिया। हालांकि, माना जाता है कि अशफ़ाक़ ने इस तरह की योजना का विरोध किया था, लेकिन बिस्मिल के आदेश को उन्होंने तामील किया। इस मामले में 26 सितम्बर को अशफ़ाक़ पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए। संयोग से इसी दिन देश में एकसाथ कई गिरफ्तारियां हुई थीं। बाद में उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया।

रामप्रसाद बिस्मिल

रामप्रसाद बिस्मिल एक साहित्यकार, कवि व इतिहासकार भी थे। वे राम और अज्ञात के नाम से कविताएं और लेख लिखते थे। बिस्मिल ने अपने जीवनकाल में कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित भी किया। क्रांति का स्वभाव इस कदर हावी था कि अपने पुस्तकों को बेचकर वह हथियार खरीदा करते थे और इसका उपयोग ब्रिटिश राज के खिलाफ होता था। अपने जीवनकाल में उन्होंने 11 पुस्तकें प्रकाशित कीं जिन पर ब्रिटिश सरकार ने पाबन्दी लगा रखी थी। बिस्मिल न सिर्फ कारोरी कांड बल्कि मैनपुरी षडयंत्र सरीखी आंदोलनकारी घटनाओं में भी शामिल थे। वह हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। काकोरी कांड की ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान ब्रिटिश जज ने कहा कि साधारण ट्रेन डकैती नहीं, अपितु ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने की एक सोची समझी साजिश थी।

ठाकुर रोशन सिंह


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ठाकुर रोशन सिंह ने काकोरी कांड में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं लिया था। इसके बावजूद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें फांसी के फन्दे पर लटका दिया। रोबीले व्यक्तित्व के धनी रोशन सिंह ने असहयोग आन्दोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी और बाद में बरेली जिले में हुए गोलीकांड में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इस सजा को काटकर वह जब वापस आए तो हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन में शामिल हो गए। वह एक दक्ष निशानेबाज थे।

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