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अरुणिमा सिन्हा: एक पैर खोने के बाद भी फ़तह किया माउंट एवरेस्ट, मिसाल है इनकी कहानी

Updated on 7 March, 2019 at 4:40 pm By

अरुणिमा सिन्हा एक ऐसा नाम है, जिनके नाम के साथ ही संघर्ष की कहानी जुड़ी है। अरुणिमा सिन्हा एक वॉलीबॉल प्लेयर और पर्वतारोही हैं।  अरुणिमा ने अपने संघर्ष से ये बताया है अगर इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो उसके सामने कितनी भी मुश्किलें आ जाएं उसे फ़र्क नहीं पड़ता। वो बस आगे बढ़ना जानता है।


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arunima sinha biography in hindi- अरुणिमा सिन्हा

 

 

नेशनल लेवल पर खेला है वॉलीबॉल

अरुणिमा के पिता सेना में इंजीनियर थे। लेकिन अरुणिमा जब 3 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी मां ने ही उनकी परवरिश की। अरुणिमा की मां हेल्थ डिपार्टमेंट में सुपरवाइज़र थीं। अरुणिमा सिन्हा उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश से पूरी की। अरुणिमा ने आगे की पढ़ाई उत्तरकाशी से की है। खेल-कूद में रुचि रखने वाली अरुणिमा ने माउंटेनियरिंग कोर्स किया था। इसी के साथ उन्होंने नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल भी खेला है।

 


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Arunima Sinha mount everest - माउंट एवेरस्ट अरुणिमा सिन्हा

 

 

एक हादसे ने बदल दी पूरी ज़िंदगी

अरुणिमा सिन्हा एक स्पेर्ट्सपर्सन रही हैं। उन्होंन नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल खेला है। अरुणिमा चाहती थीं वो खेल के साथ-साथ नौकरी भी करें। इसकी चाहत में उन्होंने सीआईएसएफ़ की एक पोस्ट के लिए आवेदन भी दिया था। बस यहीं से अरुणिमा की ज़िंदगी ने रुख मोड़ लिया। वो चाहती तो थीं नौकरी करना, लेकिन उन्की किस्मत ने उन्हें वो दौर दिखा दिया कि वो खेल से भी दूर हो गई। अरुणिमा के जीवन में एक हादसा हुआ, जिसने उनसे उनका सबकुछ छीन लिया।

अरुणिमा की सीआईएसएफ़ की परीक्षा दिल्ली में थी, जिसमें शामिल होने के लिए अरुणिमा लखनऊ से दिल्ली की ओर जा रही थीं। पद्मावती एक्सप्रेस में उन्हें कुछ बदमाशों ने घेर लिया और उनका बैग और सोने की चेन लूटने की कोशिश की। जब बदमाश इस कोशिश में नाकामयाब हो गए तब उन्होंने अरुणिमा को ट्रेन से नीचे फेक दिया। अरुणिमा जब नीचे गिरी तो उन्होंने देखा कि दूसरे ट्रैक से भी एक ट्रेन आ रही है। अरुणिमा खुद को सम्भाल पाती या ट्रैक से दूर हट पातीं इतनी देर में ट्रेन इनके पैर को कुचलते हुए गुज़र गई। इसके बाद क्या हुआ अरुणिमा को कुछ याद नहीं।

हादसे के बाद डॉक्टरों ने अरुणिमा को बचाने के लिए उनके एक पैर को काट दिया। इससे अरुणिमा की जान तो बच गई, लेकिन उनका सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया। एक खिलाड़ी के लिए दिव्यांग हो जाना उसके लिए सबसे ज़्यादा झटका लगने वाली बात है। इस हादसे के बाद अरुणिमा की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई। कहीं ना कहीं अरुणिमा ने इसके लिए अपनी किस्मत को कोसना शुरू कर दिया था। क्योंकि किस्मत ने उनसे देश के लिए बॉलीवॉल खेलने का मौका छीन लिया था।

 

Arunima Sinha inspirational story - अरुणिमा सिन्हा प्रेरणादायक कहानी

 



 

ऐसे बदली राह

अरुणिमा नहीं जानती थीं उनकी किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर है। हादसे के बाद अरुणिमा 4 महीने तक दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती रहीं। एम्स में भर्ती होने के समय अरुणिमा को नहीं पता था आगे ज़िंदगी उन्हें कहां ले जाएगी या ज़िंदगी बचेगी या नहीं। लेकिन चार महीने बाद अस्पताल से निकलते समय अरुणिमा को पता था उन्हें क्या करना है। उन्हें अब किस रास्ते पर चलना है। अस्पताल से अरुणिमा विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने का सपना लेकर बाहर निकलीं।

 

 

यहां से मिली प्रेरणा

अरुणिमा को आगे बढ़ने का साहस क्रिकेटर युवराज सिंह से मिला, जिन्होंने कैंसर से लड़ाई कर जीत हासिल की। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद अरुणिमा अपने घर जाने की बजाय सीधे बिछेन्द्रे पॉल के पास गईं। बिछेन्द्रे पॉल जमशेदपुर की रहने वाली हैं। वो एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही हैं। अरुणिमा की हालत देखते हुए बिछेन्द्रे ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। लेकिन अरुणिमा के बुलंद हौसले और स्पेर्ट्समैनशिप के आगे वो भी हार मान गईं। अरुणिमा ने बिछेन्द्रे की निगरानी में नेपाल से लेकर लेह-लद्दाख में पर्वतारोहण के गुण सीखे, जिसके बाद अरुणिमा ने 53 दिनों तक पहाड़ की चढ़ाई के बाद 21 मई 2013 को एवरेस्ट की चोटी फतह करने का रिकॉर्ड बनाया।

 

 

यहां नहीं थमा सफ़र

एवरेस्ट फतह करने के बाद अरुणिमा विश्व की पहली महिला दिव्यांग पर्वतारोही बन गई थीं, लेकिन उनका सफ़र यहीं नहीं थमा। अरुणिमा ने दुनिया की छह प्रमुख पर्वत चोटियों पर तिरंगा लहराकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। वहीं हाल ही में उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर्वत चोटियों में शामिल अंटार्कटिका के ‘विन्सन मैसिफ़’ हिल पर भी तिरंगा फहराने में कामयाबी हासिल की है।

 

Arunima Sinha mount everest - माउंट एवेरेस्ट फ़तेह करने वाली अरुणिमा सिन्हा

 

 

अरुणिमा पर बनेगी फ़िल्म

अरुणिमा के अथक प्रयास और मेहनत के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। अरुणिमा ने अपने जीवन के ऊपर एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम है ‘बॉर्न अगेन ऑन द माउंटेन’। अब अरुणिमा के ऊपर बॉलीवुड में भी फ़िल्म बनने जा रही है। इस फ़िल्म में अरुणिमा का किरदार अभिनेत्री आलिया भट्ट निभाने जा रही हैं।

 

arunima sinha film casting alia bhatt - अरुणिमा सिन्हा फ़िल्म आलिया भट्ट

 


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वाकई में अरुणिमा ने साबित किया है अगर कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है। फिर चाहे रास्ते में कितनी भी रुकावटें आएं, आगे बढ़ने वाला व्यक्ति हमेशा आगे ही बढ़ता है।

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