अरुणाचल प्रदेश के इस ‘मुख्यमंत्री आवास’ को भुतहा क्यों मानते हैं लोग ?

Updated on 7 Oct, 2017 at 5:22 pm

भूत-प्रेत होते हैं या नहीं इस मुद्दे पर हर किसी की राय अलग-अलग होती है। कुछ लोगों को लगता है कि भूत जैसी कोई चीज़ नहीं होती, ये तो बस मन का वहम होता है। जबकि कुछ लोग भूतों पर यकीन करते हैं। इतना ही नहीं कई बार हमारे आसपास कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जो हमें ये मानने पर मजबूर कर देती हैं कि कुछ तो है जो अजीब है।

कुछ ऐसी ही अजीब कहानी है अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री निवास (बंगले) की, जो अब गेस्ट हाउस में तब्दील हो चुका है।

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के नीती विहार इलाके में स्थित मुंख्यमंत्री निवास के बारे में कहा जाता है कि यह भूत, आत्माओं का निवास है। तभी तो अब तक के चार मुख्यमंत्रियों में से कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। यहां तक कि तीन मुख्यमंत्रियों की मौत भी हो चुकी है।

पहले मुख्यमंत्री दोरजी खांडू 2009 में पहली बार इस बंगले में रहने आए। वर्ष 2011 में प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। इसके बाद जारबोम गैमलीन मुख्यमंत्री बने, उन्हें भी कई तरह की दिक्कतों को सामना करना पड़ा। लंबी बीमारी के बात उनका भी देहांत हो गया।

तीसरे सीएम नाबाम तुकी को भी कुछ ही दिनों में गैमलीन के सपोर्ट्स द्वारा की गई हिंसा की वजह से मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद कुछ महीनों के लिए कलिखो पुल सीए बने। जल्द ही नाबाम तुकी ने कलिखो की जगह ले ली, लेकिन अपनी ही पार्टी के कुछ लोगों के विरोध के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। फिर पेमा खांडू सीएम बने। इस बीच कलिखो मुख्यमंत्री निवास में ही थे, उन्हें कुछ दिनों के भीतर सीएम हाउस खाली करना था, मगर उससे पहले ही अगस्त 2016 में उन्होंने आत्महत्या कर लिया। इतना ही नहीं उसे कमरे के बंगल वाले कमरे में उस बंगले के एक स्टाफ ने भी आत्महत्या कर ली।

इन घटनाओं के बाद से लोगों के साथ ही सरकार को भी यकीन हो गया कि यहां कुछ तो है, जिस वजह से ऐसी घटनाएं हो रही है। फिर सरकार ने सीएम हाउस की साफ-सफाई और पूजा पाठ करवाकर इसे गेस्ट हाउस में तब्दील कर दिया। इसके अलावा यहां सिविल सर्वेंट्स को ट्रेनिंग भी दी जाती है। फिलहाल, सरकार ने बंगले की शुद्धी के लिए भले ही पूजा-पाठ करवा दिए हों, मगर इस बंगले पर भूतहा का टैग तो लगा ही हुआ है।

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