आ रहा है आर्टिफिशियल इन्जेलिजेन्श, जानिए कितनी सुरक्षित है आपकी नौकरी

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Updated on 6 Apr, 2017 at 5:07 pm

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आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्श। इसके बारे में तो आपने भी सुना ही होगा। अगर नहीं, तो यह जरूर पता होगा कि बहुत सारी नौकरियां जाने वाली हैं। नौकरी पर अब रोबोट रखे जाएंगे।

जी हां, औद्योगीकरण की नई क्रान्ति यही है। अब फैक्ट्रियों में लोगों के बदले रोबोट काम करेंगे।

रोबोट के काम लेने को स्मार्ट तरीका का जा सकता है। हालांकि, इसका एक स्याह पक्ष भी है। रोबोट यानी आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्श के अस्तित्व में आने से दुनिया भर में बड़ी संख्या में नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों के बेरोजगार होने का डर सता रहा है।


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आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्श चौथी औद्योगिक क्रान्ति की देन है। इसकी भूमिका को लेकर उद्योग जगत उत्साहित है, लेकिन इसके आगमन ने आशंकाओं को भी जन्म दिया है। मैनुफेक्चरिंग सेक्टर में करोड़ों लोग अपनी नौकरी से हाथ धो बैठेंगे। वहीं, आशंका जताई जा रही है कि आईटी फील्ड में भी लाखों लोग अपनी नौकरी खो देंगे। खासकर मिडिल लेवल के जॉब्स अब सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं।

प्रतिष्ठित भारतीय आईटी कंपनी इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्का का बयान इस मामले में महत्वपूर्ण है।

सिक्का कहते हैंः

“कई मायनों में हम इस विकास के शुरुआती क्रम में हैं। आगे संभावना है कि इस (औद्योगिक) प्रगति में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लोग पीछे छूट जाएंगे।”

विशेषज्ञ कहते हैं कि भविष्य में कथित व्हाइट कॉलर जॉब के अधिकतर लोग काम से बाहर हो जाएंगे। न केवल औद्योगित उत्पादन, बल्कि सेवाओं के ऑटोमेटेड होने की स्थिति साधारण नौकरियां भी संभवतः खत्म हो जाएंगी। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो औद्योगिक घरानों की कोई स्पष्ट नीति दिख रही है और न ही सरकारों की। जनता को तो खैर लगता है कि इससे कोई लेना-देना ही नहीं है। खासकर भारत जैसे देश में।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीने लगार्द कहती हैंः



“सरकारों को कामगारों के लिए सुरक्षात्मक नीतियां बनाने और लोगों को दूसरे कामों के लिए प्रशिक्षण देने की ओर तुरंत ध्यान देना होगा।”

जॉब कंसल्टेंसी ग्रुप मैनपावर द्वारा 43 देशों के 18,000 कर्मचारियों के बीच कराए एक सर्वेक्षण में यह बात निकलकर सामने आई है कि फिलहाल जो वर्कफोर्स है उसका 45 फीसदी काम आज उपलब्ध तकनीक की मदद से ऑटोमेटेड किया जा सकता है। इसका मतलब साफ है कि 45 फीसदी नौकरियां रोबोट के हवाले की जा सकती हैं। वहीं, ग्लोबल कंसल्टेंसी मैकिंजी का कहना है कि 60 फीसदी से ज्यादा नौकरियां और 30 फीसदी से अधिक बिजनेस गतिविधियां आज की तरीख में ऑटोमेट की जा सकती हैं।

आंकड़े बताते हैं कि यूरोप में 70 फीसदी, चीन में 77 फीसदी, अमेरिका में 47 फीसदी तथा भारत में 69 फीसदी काम अब रोबोट करेंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इससे कौन प्रभावित होंगे?

बैंकिंग में बैक ऑफिस काम, बीमा और दूसरी वित्तीय सेवाएं सीधे आईटी ऑटोमेशन के दायरे में हैं। वहीं, डॉक्टरी और अकाउन्टेन्सी जैसे पेशे पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऊबर और एयरबीएनबी जैसी इंटरनेट आधारित कंपनियों ने कई पुराने प्रचलित बिजनेस मॉडलों को तोड़ा है। यहां तक कि न्यूज स्टोरीज लिखने वाले प्रोग्राम भी आ गए हैं। रोबोट हजारों न्यूज स्टोरीज रोजाना लिख रहे हैं।

रोजगार के पुराने अवसर बंद हुए हैं तो नए खुले हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि बदलाव के इस दौर में लोगों को लचीला रवैया अख्तियार करना होगा। वह अब किसी एक खास करियर के साथ जुड़कर नहीं रह सकते, क्योंकि बदलाव कभी भी हो सकता है। लोगों को अलग-अलग के काम करने के लिए तैयार रहना होगा।

खैर आप अपने काम को देखते हुए स्वतः अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले समय में इसकी क्या स्थिति होने वाली है। अब संभवतः करियर बदलने का समय आ गया है। कुछ ऐसा करना होगा, जो स्मार्ट मशीन के वश में नहीं होगा।


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