कबाड़ से बनाते हैं कलात्मक शिल्प, संजो रहे हैं पुरानी कला को

Updated on 13 Jan, 2017 at 4:26 pm

Advertisement

आज पुरानी तकनीक और कलाएं धीरे-धीरे प्रायः खत्म होती जा रही हैं। आधुनिकता के इस दौर में प्राचीन शिल्प कला की डुबती नैया को बेंगलुरू के एक शख्स राहुल खडालिया कबाड़ तकनीक का प्रयोग कर एक नया आयाम दे रहे हैं।

राहुल आज के आधुनिक समय में पुरानी कला को संजोने का काम कर रहे हैं। समय के साथ ही आधुनिक युग में नई–नई तकनीक आ रही हैं, जिससे कलाएं आमतौर पर कम्प्युटराइज्ड होती जा ही हैं और इससे इंसान अपने जीवन को सरल बना रहा है।

अब राहुल ने पुरानी शिल्प कला को संजोने का बीड़ा उठाया है। शुरू में राहुल ने चार लोगों को लेकर यह काम शुरू किया था। इसमें वह प्राचीन भारतीय शिल्प और परम्पराओं को जीवित रखने के लिए कबाड़ हो चुके सामान जैसे पुराने पोस्टर, पुराने न्यूजपेपर, रबर, टयूब्स, पुराने कंटेनर, पुरानी रंगीन प्लास्टिक चूड़ियां तथा पत्थर का इस्तेमाल कर बेहतरीन शिल्प का निर्माण करते हैं।



ABCD के नाम से स्टूडियो चलाने वाले राहुल बताते हैं कि उन्हें यह आइडिया उस समय आया, जब उन्होंने गुजरात के कच्छ के ब्लॉक प्रिंटर्स पर लिखा एक लेख पढ़ा था। इस लेख को पढ़ने के बाद उन्होंने महसूस किया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक के आने से परम्परागत कलाएं पीछे चली जाती हैं और विलुप्त हो जाती हैं।

राहुल के इस आभियान की खास बात यह है कि वह अपने आर्टवर्क के लिए रिसाइकिलिंग पध्दति की मदद लेते हैं। इससे स्वच्छता तथा धन अर्जित करने में मदद मिलती है। राहुल के इस अभियान से पुराने विरासत को संजोने के साथ-साथ स्वच्छता अभियान एवं लोगों को रोजगार मुहैया कराने में भी सहायता मिलेगी।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement