10 कारण जिनसे तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

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Updated on 3 Nov, 2016 at 7:42 pm

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सूडान से सोमालिया तक और इराक से अफगानिस्तान तक, दुनिया को कई हिंसक सशस्त्र संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है जो कि तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। एक तरफ यह भी है कि शांति, आशावादी और काल्पनिक दुनिया में रहने वाले लोग भविष्य में इस तरह की किसी भी आपदा से इन्कार करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है, दुनिया पिछले दो विश्व युद्धों की तुलना में आज बेहद बदतर स्थिति में पहुंच गई है।

1. इस्लामिक स्टेट संघर्ष

इस्लामिक स्टेट या आईएसआईएस। इसका पूरा नाम है- इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया। इस संगठन ने इराक और सीरिया के एक विशाल भू-भाग पर अपना नियंत्रण स्थापित कर हर किसी का ध्यान आकर्षित किया है। इस कुख्यात आतंकवादी समूह के बारे में बात करें तो इसने लीबिया के साथ ही नाइजीरिया के कई क्षेत्रों पर भी नियंत्रण कर लिया है।

 

the world according to the Islamic state.

The world according to the Islamic State. GeoCurrents


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यह आतंकवादी समूह दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के कई अन्य हिस्सों में मानवाधिकार हनन की कार्रवाई में शामिल रहा है। सिर कलम कर सजा देना और बलात्कार जैसी प्रवत्तियों के लिए इस्लामिक स्टेट कुख्यात है।

 

अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, तुर्की, मिस्र और रूस सहित 60 से अधिक देश है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आईएसआईएस के खिलाफ युद्ध में शामिल रहे हैं।

2. बोको हरम विद्रोह

पश्चिम अफ्रीकी आतंकवादी संगठन बोको हरम नाइजीरिया और कैमरून में होने वाली हजारों मौतों के लिए ज़िम्मेदार है। यह जिहादी गुट नाइजीरिया के मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक हिंसा के मुद्दों का केंद्र रहा है।

 

वर्ष 2014 में बोको हरम ने 200 स्कूली छात्राओं का अपहरण कर लिया। इन संगठन ने उन छात्राओं को यौन गुलाम बनाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा ने बंदी लड़कियों को मुक्त कराने के उद्देश्य से ‘ब्रिंग बैक आवर गर्ल्स’ यानि ‘हमारी लड़कियाँ वापस लाओ’ अभियान में हिस्सा लिया।

 

3. यमन संकट

भारतीय नौसेना ने हाल ही में यमन में शुरू हुए गृह युद्ध के बाद से यहां से हजारों भारतीयों और अन्य देशों के नागरिकों को बचाया है।

 

यह खाड़ी देश, शिया संप्रदाय के हाउती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सुन्नी गठबंधन सेना द्वारा समर्थित सरकारी बलों के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से संकटग्रस्त रहा है।

 

यहां युद्ध की स्थित प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। इस युद्धग्रस्त देश से अपने नागरिकों को निकालने में भारत के प्रयास की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई थी।

4. लीबिया नागरिक युद्ध

लीबिया में इस्लामी कट्टरपंथियों और गैर इस्लामी बलों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। इस्लामिक गुट लीबिया डॉन ने अल-कायदा के जिहादियों के साथ हाथ मिला लिया है। इस संगठन ने 90 के दशक में गद्दाफी के खिलाफ हथियार उठाया था।

 

केवल यही नहीं, इन दोनों गुटों को एक अन्य कट्टरपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदहुड का समर्थन भी प्राप्त है। और इस वजह से इस क्षेत्र में कानून का राज खत्म हो गया है।

5. आतंकवाद पर पाकिस्तान से जंग

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जुंदुल्लाह, लश्कर-ए-इस्लाम, तहरीक-ए-नफ़ाज़-ए-शरीयत-ए-मोहम्मदी, अल-कायदा समेत कई आतंकवादी संगठनों की वजह से पाकिस्तान आतंकवाद का प्रमुख केंद्र है। यही नहीं, कुख्यात इस्लामिक स्टेट भी खुले तौर पर पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहा है। पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में इसकी शाखाएं मौजूद हैं।

 

वजीरिस्तान, यानि उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के आतंकवादी समूहों से निपटने में अक्षमता के कारण पाकिस्तानी सरकार की कड़ी आलोचना होती रही है।

 



इन तमाम तथ्यों के बावजूद पाकिस्तान को अमेरिका और चीन से अरबों डॉलर की फंडिंग मिलती है। यही नहीं, इन दोनों देशोें से इसे हथियार भी सबसे अधिक मिलता है।

 

6. इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष

इजराइल और फिलस्तीन के बीच संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जानें गंवा बैठे हैं। लगातार हो रही हिंसा की वजह से जेरूसलम, जो स्वर्ण नगरी के रूप में विख्यात है, की महिमा भी खंडित हुई है। संघर्ष ने सीमावर्ती शहरों के कई क्षेत्रों को ‘नो-गो जोन’ में परिवर्तित कर दिया है।

 

पथराव, हिंसक हमले, हत्याएं इस क्षेत्र में नित्य रूप से होती रही हैं। हाल के दिनों में इजराइल ने फिलीस्तीनी क्षेत्र में स्कूलों और अस्पतालों पर बमबारी की। इससे अधिक चिन्ता की बात और क्या हो सकती है।

7. सूडान में युद्ध

दारफुर और देश के दक्षिणी क्षेत्रों में लगातार हो रही हिंसा की वजह से सूडान झुलस रहा है।

 

अब तक हजारों की संख्या में लोग सरकारी बलों और सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी (एसएलएम/ए) और जस्टिस एंड इक्वलिटी मूवमेन्ट (जेईएम) विद्रोही गुटों के बीच सशस्त्र संघर्ष में मारे गए हैं।

8. अस्थिर सोमालिया

अस्थिर सोमालिया को अपने पैरों पर खड़ा होने में अभी कई साल का समय लगेगा। सोमालिया की सरकार, संघीय अफ्रीकी संघ शांति के सैनिकों और विभिन्न आतंकवादी समूहों के बीच चल रही सशस्त्र हिंसा की वजह से देश के दक्षिणी भाग में हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं।

 

सोमालिया जलदस्यु गुटों के लिए स्वर्ग माना जाता है। दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री व्यापार मार्ग से सोमालिया की निकटता और देश की आंतरिक समस्या हर किसी के लिए चिन्ता का विषय है।

9. यूक्रेन में सशस्त्र संघर्ष

यूक्रेन के पूर्वी भाग में रूस समर्थक और सरकार विरोधी बल सशस्त्र संघर्ष में लगे हुए हैं। इस संघर्ष की शुरूआत वर्ष 2014 में यूक्रेनी क्रांति और उरोमाइडन आंदोलन के बाद शुरू हुई थी।

 

अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों ने रूस पर आरोप लगाया है कि इसने पूर्वी यूक्रेनी पर जबरन कब्जा कर लिया है। वहीं रूस का कहना है कि यह केवल क्रीमिया में हुए जनमत संग्रह का असर है। दरअसल, पूर्वी यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र की अधिकतर जनता रूस के साथ होना चाहती है।

 

इन दोनों देशों के बीच हालात तब बिगड़े, जब एक रूसी मिसाइल ने मलेशियन नागरिक विमान MH17 पर हमला किया, जिसमें सवार सभी यात्रियों की तत्काल मृत्यु हो गई।

10. वैश्विक मंदी

हम मानते है वैश्विक मंदी एक सशस्त्र संघर्ष नहीं है, लेकिन किसी न किसी तरह से यह एक महत्वपूर्ण कारक होने जा रहा है। प्रथम विश्व युद्ध और दूसरा विश्व युद्ध एक-दूसरे से बहुत पृथक थे, इसके बावजूद दोनों में एक समानता थी। वह थी आर्थिक समानता।

 

इन युद्धों के पहले के वर्षों में संपूर्ण विश्व मंदी और अवसाद से गुजर रहा था। दोनों युद्धों ने अमेरिका को इस मंदी से उबरने में मदद की, मंदी के कारण 20 प्रतिशत से अधिक व्यापार धीमा रहा था।

आर्थिक विशेषज्ञों ने फिर एक बार अमेरिका और यूरोप के लिए आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी की है। तो अब क्या समस्त विश्व पर तीसरे विश्व युद्ध का साया मंडरा रहा है?


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