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अंडे खा-खाकर कहीं आप बीमार तो नहीं पड़ रहे!

Published on 2 November, 2017 at 8:49 pm By

संडे हो या मंडे रोज़ खाओ अंडे…है ना! हम सबको पता है कि अंडे हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं।


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डॉक्टर से लेकर सरकार तक अंडों के उपयोग को बढ़ावा देती हैं। बकायदा विज्ञापन जारी कर अंडे खाने को कहा जाता है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में अंडे खाने से मना किया गया है। वजह इनका दूषित होना है। NDTV की रिपोर्ट में इस संबंध में विस्तार से बताया गया है।

भोजन दूषण भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चिंता का विषय है। दूषित आहार से सालाना हज़ारों मौतें होती हैं। अंडे भी दूषित होते हैं। अब आप जानना चाहते होंगे कि आखिर अंडे दूषित कैसे होते हैं!

ऐसे दूषित होते हैं अंडे!

दरअसल सालमोनेल और ई. कोली दूषित आहार के प्रमुख अवयव हैं। ये आसानी से डेयरी, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स के सहारे हमारे शरीर तक पहुंच जाते हैं। साथ ही ये दोनों बैक्टिरिया पानी के माध्यम से से भी हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। गाय के दूध, अंडे. मुर्गी और बतख के बच्चों में ये जीवाणु अपना घर बना लेते हैं और हमें हानि पहुंचाते हैं।



भारत में पोल्ट्री फ़ार्म्स अंतर्राष्ट्रीय स्टैंडर्ड्स के हिसाब से मुर्गीपालन नहीं करते। स्वच्छता का भी पूरा ध्यान नहीं रखा जाता है, जिससे मुर्गियां बीमार होती हैं और बीमार मुर्गियां संक्रमित अंडे देती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि अंडों को पकाने के ढंग से भी संक्रमण फैलता है। लम्बे समय तक फ्रीज में रखे अंडे अन्य खाद्य पदार्थों को भी खराब कर सकते हैं। दूषित भोजन खाने से डायरिया, डिहाइड्रेशन और यहां तक की टाइफ़ाइड भी हो सकता है। दूषित अंडों से यही खतरा है।

ऐसे करें इस्तेमाल


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हो सके तो ऑर्गनिक अंडे ही खरीदें। फ्रीज में रखने से पहले अंडों को अच्छी तरह धो लें। अंडे को हमेशा ढंक कर रखें। कच्चे अंडे तो एकदम न खाएं, संक्रमण का खतरा रहता है।


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हफिंग्टन पोस्ट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, 2005 में एक शोध परिणाम में ये खुलासे हुए थे कि पंजाब में अंडों के सैंपल में जीवाणु पाए जाते हैं और इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे ही 2010 में छपी एक अन्य रिपोर्ट में अंडों में लीड और कैडमियम जैसे ख़तरनाक तत्व होने की बात कही गई थी। ऐसी ही लीड के कारण मैगी पर रोक लगी थी।

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