सिक्किम की इस पहली महिला IPS के संघर्ष के बारे में जानेंगे तो आप भी करेंगे सलाम

Updated on 3 Dec, 2017 at 12:18 pm

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यूं तो अब देश में अवसरों के मामलों में महिला-पुरुष के बीच की खाई पटती जा रही है, लेकिन फिर भी कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बहुत ही कम है। जाहिर है महिलाएं भी अब खुद को साबित करने से नहीं चूकती हैं। हालिया मामला सिक्किम का है, जहां अपराजिता राय ने कड़े संघर्ष के बल पर सिक्किम की पहली महिला आईपीएस होने का गौरव हासिल किया है।

गौरतलब है कि मात्र 8 साल की उम्र में पिता के गुजर जाने के बाद आर्थिक तंगी रहते हुए भी अपराजिता ने जो मुकाम हासिल किया है, वह काबिले तारीफ़ है। इनकी कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने जीवन कुछ बड़ा करना चाहती हैं।

अपराजिता अपने इस सफलता का श्रेय अपनी मां को देती हैं, जो एक शिक्षिका हैं और उन्होंने अपराजिता को अकेले ही पाला है। अपराजिता के दिवंगत पिता सिक्किम में विभागीय वन अधिकारी रहे थे।

अपराजिता ने बचपन में ही ठान लिया था कि वे आगे चलकर बड़े सामाजिक बदलाव के लिए काम करेंगी।

 


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अपराजिता ने पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से बीए एलएलबी (ऑनर्स) से स्नातक किया हुआ है। अपराजिता ने कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ज्यूरिडिशियल साइंसेज से बीए एलएलबी की पढ़ाई 2009 में पूरी की। उन्होंने इसमें गोल्ड मेल हासिल किया था।

उन्होंने साल 2010 में सिविल सर्विस एग्ज़ाम में 768 रैंक हासिल किया था लेकिन साल 2011 में एक बार फिर ये एग्जाम में बैठी और इस बार उन्होंने 358 रैंक हासिल किया। अपराजिता UPSC की एग्जाम में तो सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन इस बार वो सिक्किम की सबसे अच्छी रैंक हासिल करने वाली पहली महिला बन गई।

 

बकौल अपराजिता अब वे इसी उद्देश्य पर काम करेंगी कि जो भी व्यक्ति उनके पास आये, उसे किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, जो कि अमूमन सरकारी दफ्तर में देखने को मिलता है।

 

अपराजिता के न केवल एकेडेमिक्स शानदार हैं, बल्कि उन्हें संगीत-नृत्य में भी खासी रुचि है। कहते हैं न, इरादे बुलंद हो तो कोई भी सफलता से रोक नहीं सकता!

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