एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर के शिकार लोगों में होती हैं ये 5 सुपरपॉवर्स !

Updated on 3 Mar, 2018 at 1:26 pm

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विज्ञान के अनुसार एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर वाले लोग बहुत खास होते हैं। इस डिसऑर्डर में व्यक्ति बहुत अधिक चिंतित रहता है और बहुत ज़्यादा सोचता है। ऐसे लोग जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं और ये बहुत मज़बूत होते हैं। यदि आपको भी एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर है, तो उसके बुरे पहलू की बजाय, अच्छाई पर गौर फरमाइए।

 

1. आईक्यू बढ़ना

 

न्यूयॉर्क की सुनी डाउनस्टेट मेडिकल सेंटर की रिसर्च के मुताबिक, एंग्ज़ाइटी के कारण लोग ज़्यादा स्मार्ट बन जाते हैं। आपको ये सुनकर हैरानी ज़रूर हो रही होगी, मगर एंग्ज़ाइटी में लोग बहुत बारीकी से विश्लेषण करते हैं। वो हर संभव परिणाम के बारे में जानते हैं और उसके लिए तैयार रहते हैं।

2. ज़्यादा सहानुभूति जताना

 

सामान्य लोगों की बजाय एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति दूसरों के प्रति ज़्यादा सहानुभूति रखते हैं। उनकी संवेदनाएं कई बार इतनी ज़्यादा होती है कि बाकी लोग समझ नहीं पातें। ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं को बहुत बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। ये बहुत इमोशनल होते हैं। सहानुभूति का भाव ज़रूरी है इससे आप दूसरों की ज़िंदगी में कुछ बदलाव ला सकते हैं।

 

 

3. झूठ पकड़ने की शक्ति

 


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ऐसे व्यक्ति बहुत सतर्क होते हैं। और यदि कोई उनके सामने झूठ बोलता है तो वो उसे तुरंत पकड़ लेते हैं। ऐसे लोग बहुत बहादुर होते हैं। सामने वाला कोई बेतुकी बात कर रहा है तो उस पर तुरंत उंगली उठा देते हैं। सच को सामने लाने से ये डरते नहीं है।

 

 

4. आसपास की नकारात्म और सकात्मक ऊर्जा को पहचानने की शक्ति

 

साधारण इंसान अपने आसपास के लोगों से ये नहीं कह सकता कि आपके यहां मौजूद रहने से नकारात्मक फीलिंग आ रही है। मगर एंग्ज़ाइटी डिसॉडर वाले व्यक्ति ऐसा कहने से नहीं डरते। जब आपके पास खड़े किसी व्यक्ति से सकारात्मक फीलिंग आती है तो वो सकारात्मक ऊर्जा है और यदि अपने पास खड़े किसी व्यक्ति से आपको असहज महसूस होता है तो ये नकारात्मक ऊर्जा का संकेत है।

 

 

5. जिंदगी बचाने की शक्ति

 

एंग्ज़ाइटी की वजह से लोग उस चीज़ की भी कल्पना कर लेते हैं जिसे सामान्य लोग नहीं सोच पातें और ये शक्ति ही सर्वाइवल मैकेनिज़्म के रूप मे इस्तेमाल होती है। मतलब ये कि अगर कुछ बुरा होने वाला है तो ऐसे लोगों को पहले से इस बात का आभास हो जाता है। ऐसे में वो अपने आसपास के लोगों को सतर्क कर सकते हैं। ऐसे लोगों को घर से बाहर निकलने या अकेले होने पर कुछ बुरा महसूस होता है या फिर उन्हें ऐसा लगता है कि कुछ अनहोनी होने वाली है, जबकि सामान्य लोग इसे महसूस नहीं कर पाते।

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