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मुर्गे का वज़न बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बिगाड़ सकता है आपकी सेहत

4:40 pm 5 Sep, 2017

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यदि आप भी नॉनवेज के शौकीन हैं तो अब ज़रा संभलकर चिकन खाइए, क्योंकि इन दिनों पोलट्री फार्म में मुर्गे का वज़न जल्दी बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है, जो आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक, एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल मिसाइल की तरह खतरनाक होता है। इससे न सिर्फ संक्रामक बीमारी फैलेगी, बल्कि इलाज में दवाओं का असर भी नहीं होगा। IMA ने सरकार से मुर्गो व पशुओं पर एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है।


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सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (CSE) के एक अध्ययन के मुताबिक जिस एक एंटीबायोटिक फ्लोरोक्विनोलोन का इस्तेमाल मुर्गो का वजन बढ़ाने के लिए किए जाता है वह दवा मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी के मरीजों को दी जाती है। इस तरह के मरीजों पर आम दवाएं असर नहीं करतीं। दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न होने के कारण देश में एमडीआर टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिसमें दो तिहाई मरीज ऐसे हैं जिन पर अधिक क्षमता वाली एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी नहीं हो रहा है।

मुर्गो को एंटीबायोटिक दवा देकर उनका वजन बढ़ा पोलट्री फार्म वाले मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि इससे उन्हें भी नुकसान होगा। मुर्गो के मल आदि से एंटीबायोटिक निकलकर पानी और मिट्टी को संक्रमित करेगी। इससे सबसे पहले वही लोग संक्रमित होंगे जो इसका कारोबार करते हैं।

एंटीबायोटिक वाला चिकन खाने से आपके शरीर पर भी एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होगा। यानी किसी तरह की बीमारी होने पर समस्या और बढ़ सकती हैं, क्योंकि तब डॉक्टर को भी समझ नहीं आता कि कौन-सी दवा दी जाए। इसलिए बेहतर होगा कि नॉनवेज का अपना शौक छोड़ दें।

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