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इन 3 प्राणियों ने साबित कर दिया कि विकास धीमा हो ये ज़रूरी नहीं

Published on 6 October, 2017 at 4:39 pm By

ये सभी जानते हैं कि विकास एक धीमी और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य ही हज़ारों सालों के विकास और बदलाव के बाद बंदर से आज के मौजूदा रूप तक पहुंचा है। हालांकि, कुछ जानवर ऐसे हैं जिनका विकास या बदलाव इतनी जल्दी होता है कि आप हैरान रह जाएंगे। कुछ जानवर अपने विकासक्रम में खुद को बड़ी ही तेज़ी से रातोरात बदल लेते हैं।

पैपर्ड मोथ (पतंगा)


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यह खासतौर पर ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड में पाया जाता है। औद्योगिक क्रांति के समय पतंगे का रंग तुरंत बदल गया था। 17वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के दौरान करीब 95 फीसदी पतंगे का रंग काला हो गया था। ऐसा बढ़ते प्रदूषण की वजह से हुआ था, क्योंकि तब प्रदूषण की वजह से पेड़ भी काले पड़ गए थे। हालांकि, सालों बाद जब वातावरण साफ होने लगा तो वो फिर से अपने पहले वाले रंग में आ गए।

चार्ल्स डार्विन ने भी अपने प्राकृतिक चयन के सिद्धांत में इसका जिक्र किया है। उन्होंने समझाया कि हल्के रंग के पतंगे जब काले हो चुके पेड़ों के पीछे छुपे तो उनका रंग भी गहरा हो गया, इससे उन्हें पक्षियों से बचने में मदद मिली।

स्पैरो (गोरैया)



1898 में अमेरिका के रोडे आइलैंड में बर्फीला तूफान आया, जिसमें 136 गोरैये जमीन पर गिर गई। इसमें से 62 तो मर गई, लेकिन 72 बच गई। जीव विज्ञानी हर्मोन बुम्प्स ने अपने अध्ययन में पाया कि जो गोरैया बच गई, उनमें कुछ अलग और खास लक्षण थे। अपने शोध पत्र में उन्होंने शहर के अलग-अलग हिस्सों के 136 गोरैया का विवरण जुटाया, जिसमें उन्होंने बताया कि तूफान में बचने वाली गोरैया बाकी गोरैया से किस तरह अलग थी।

एनोल लिजर्ड (छिपकली)

2013 में जीव विज्ञानी शेन कैंपबेल स्टैटन ने टेक्सास से ओक्लाहोमा की यात्रा करके ये जानने की कोशिश की कि कैसे उपोष्णकटिबंधीय छिपकली अमेरिका की कड़ाके की सर्दी में रहती है। 2 जनवरी 2014 में अमेरिका में बर्फीला तूफान आया, जिसने शेन को यह अध्ययन करने का मौका दिया कि छिपकली का जीवनकाल कैसा होता है और वो कैसे बदलाव के अनुरूप खुद को ढाल लेती हैं। अध्ययन में उन्होंने पाया कि एक छिपकली बर्फ की वजह से मर गई है। मरी हुई छिपकली को लैब में ले जाकर उन्होंने जांच कि तो पाया कि ये अपने विकासक्रम में थी। इसके साथ की बाकी छिपकली ठंड में मरी नहीं, बल्कि बदलने तापमान के अनुरूप खुद को ढाल लिया क्योंकि उन्होंने बदलाव को जल्दी स्वीकर कर लिया था।


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विकास और बदलवा हमेशा धीमी गति से हो ये ज़रूरी नहीं। वातावरण और जीवन की आवश्यकता इसकी गति तेज़ भी कर देती है।

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