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हर मध्यमवर्गीय परिवार के जोड़े की कहानी है फिल्म ‘अंग्रेजी में कहते हैं’

Published on 21 May, 2018 at 7:28 pm By

फिल्म ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ 18 मई को सिनेमाघरों में उतर चुकी है। उम्र से परे रहकर अपने साथी से प्यार का इजहार हमेशा करते रहना चाहिए, इस विषय पर फिल्म की कहानी केंद्रित है। प्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा इस फिल्म में 52 वर्ष के यशवंत बत्रा की भूमिका में है। उनकी पत्नी किरण बत्रा के किरदार में अभिनेत्री एकावली खन्ना है।


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बदलते वक्त के साथ आज के युवा प्यार जताने में पीछे नहीं हटते, लेकिन अभी कई आम भारतीय मध्यमवर्गीय लोगों का मानना है कि प्यार-व्यार सब फिजूल की बातें हैं। प्यार वो होता है जो शादी के बाद होता है। उससे पहले प्यार का नाम तक लेना, तौबा तौबा! लेकिन जरूरी नहीं कि शादी के बाद हर जोड़े को एक-दूसरे से प्यार हो ही जाए। आज भी कई ऐसे लोग होंगे, जिनकी शादी को कई साल बीत चुके होंगे, लेकिन फिर भी शायद ही दोनों ने एक-दूसरे को कभी प्यार जताया होगा। शादी के बाद दोनों में प्यार हो भी गया हो, फिर भी शायद ही दोनों ने एक-दूसरे को कभी आई लव यूं कहा होगा। वहीं कुछ ये सोचकर ही अपना प्यार नहीं जता पाते कि यह भी कोई कहने की बात है।

 

लेकिन यकीन मानिए प्यार जताने में कोई गुरेज नहीं करना चहिए। आप प्यार करते हैं तो उसे जताने में शर्म कैसी! शादी के रिश्ते में समय-समय पर प्यार का इजहार करना जरूरी होता है और ऐसा क्यों जरूरी है, इस बात को बड़ी ही खूबसूरती से हरीश व्यास की फिल्म ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ में दिखाया गया है।

 

 


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फिल्म में प्यार के साथ साथ कई और अहम मुद्दों को केंद्रित किया गया है। मसलन मर्दवादी सोच को बहुत ही बारीकी से इस फिल्म में दर्शाया है। ऐसी सोच जिसमें वाराणसी के रहने वाले यशवंत बत्रा (संजय मिश्रा) का मानना है कि मर्द का काम बाहर जाकर कमाना और औरत का काम केवल घर संभालना ही होता है।



 

इस फिल्म में प्रमुखता से जिक्र किया गया है कि एक हाउसवाइफ को कम नहीं समझना चाहिए। जितना एक पति का घर चलाने में योगदान होता है, उतना ही बराबर का योगदान पत्नी का भी होता है।

 

 

फिल्म में दो युवा किरदार भी है। एक शिवानी रघुवंशी (प्रीति), जो यशवंत बत्रा की बेटी है और दुसरे अंशुमन झा (जुगनू) ने यशवंत के जमाई का किरदार निभाया है।

 

शिवानी का फिल्म में दिल को छू लेने वाला एक डायलॉग है, जिसमें वो कहती हैं- ”प्यार करने का भी नाम है, चुप रहने का भी। लेकिन सुनाई तब ही देता है जब कहा जाता है।”

 


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फिल्म की कहानी कहती है कि सिर्फ प्यार करिए मत, उसे अपने साथी को जताइए भी। कैसे कोई अपने रिश्ते में प्यार के फूल खिला सकता है, प्यार के अलग रूप को दिखाती इस कहानी को आप भी जरूर देखिए।

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