आंध्र प्रदेश का यह राजनीतिज्ञ नेता है या बहुरूपिया? आप खुद तय करिए

Updated on 3 Apr, 2018 at 6:11 pm

Advertisement

लोकतंत्र में विरोध करने का चलन आम है। यह अलग बात है कि आजकल विरोध करने वालों को कोई ख़ास तवज्जो नहीं मिल पाती है। लिहाजा जनता तो जनता, नेता भी विरोध करते नजर आ रहे हैं। संसद से सड़क तक विरोध करते हुए लोग मिल जाएंगे। विरोध के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन विरोध का तरीका वही घिसा-पिटा रहता है। फिलहाल हम चर्चा करने जा रहे हैं, आंध्र प्रदेश के राजनीतिज्ञ की जिन्होंने विरोध प्रदर्शन को भी एक कला का रूप दे दिया है। उनकी चर्चा हो रही है।

चित्तूर से सांसद एन. शिवप्रसाद कुछ इस प्रकार विरोध करते हैं!

 

 

द्वापर में भगवान कृष्ण अपनी लीलाओं के लिए जाने जाते थे, लेकिन इस घोर कलियुग में नेताओं के आगे भी संभवतः घुटने टेक देते। हमारे देश में नेताओं की लीला अपरम्पार है। यह चुनाव के समय विशेष रूप से देखने को मिलता है लेकिन सांसद एन. शिवप्रसाद की लीला इससे जुदा है।

शिवप्रसाद तेलुगू देशम पार्टी से सांसद हैं और विरोध के अपने ख़ास तरीके की वजह से लाइम-लाईट में हैं।

यहां देखिए कि कैसे ये नारद बने हुए हैं!

 



 

ये पहले भी राजा हरिश्चंद्र, महिला, एक बच्चा और नारद मुनि बनकर विरोध कर चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये तर्कपूर्ण रूप से वेश धारण करते हैं। जब एक महिला का वेश धारण किया था, तब वह आंध्र की महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे ही हरिश्चंद्र बनकर वे बता रहे थे कि मोदी और हरिश्चंद्र दोनों वाराणसी से आते हैं और हरिश्चंद्र ने अपना वादा पूरा किया था।

 

बता दें कि शिवप्रसाद एक डॉक्टर हैं और इससे पहले फिल्मों में भी भाग्य आजमा चुके हैं। लिहाजा विभिन्न वेश धारण करने में उन्हें कोई झिझक नहीं होती है। आंध्र प्रदेश से तेलंगाना के अलग होने बाद से बदले हालात में शिवप्रसाद राज्य सरकार का भरपूर सहयोग करते हैं।

 

 

असल में कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सहयोगी रही तेलुगू देशम पार्टी आंध्र प्रदेश के लिए केंद्र सरकार से विशेष राज्य का दर्जा मांग रही है। इतना ही नहीं, टीडीपी द्वारा पोलावरम परियोजना के लिए 58,000 करोड़ रुपए का फ़ंड तथा अमरावती के विकास के लिए पर्याप्त बजट को सुनिश्चित करने की वकालत की जा रही है। उनका ये भी कहना है कि राज्य विधानसभा की सीटें 175 से बढ़ाकर 225 की जानी चाहिए।

 

अब मागें मानना या न मानना तो केंद्र सरकार का काम है। हम तो कला के कद्रदान हैं। शिवप्रसाद ऐसे ही एंटरटेन करते रहें, क्या पता एक दिन सरकार मान भी जाए!


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement